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औद्योगिक प्रदूषण को खत्म करने के लिए एक सप्ताह में सौंपेंगे कार्ययोजना

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मुरादाबाद। पीतल नगरी के काम्प्रेहेंसिव इन्वायरमेंटल पॉल्यूशन इंडेक्स (सीईपीआई) की स्कोरिंग में सबसे प्रदूषित शहरों की श्रेणी में छठवें स्थान पर आने की स्थिति को सुधारने की कवायद शुरू हो चुकी है। सदस्य सचिव उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए एनजीटी के आदेशों का पालन और केंद्र सरकार द्वारा जारी मैकेनिज्म के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार कराकर एक सप्ताह में शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हवा, पानी और मृदा के नमूनों से हुई स्कोरिंग में शहर को 87.80 अंक मिले थे। अमर उजाला ने 29 नवंबर 2019 के अंक में मुरादाबाद में पीतल भट्ठियां खोलने पर लगी पाबंदी हेडिंग से खबर प्रकाशित की थी। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि हवा, पानी, मृदा, नदियों के अलावा अन्य बिंदुओं पर प्रदूषण की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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सदस्य सचिव आशीष तिवारी द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार वर्ष 2018 में सौ प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों का राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से सर्वे कराया गया था। इसमें पानी, हवा और मृदा के नमूने लिए गए थे। सर्वे में मुरादाबाद को हवा में 76, पानी में 71.50, मृदा में 68.75 अंक दिए गए थे। कई अस्पतालों से दूषित हवा से होने वाली बीमारियों के मरीजों की जानकारी भी ली गई थी। कुल सीईपीआई में शहर को 87.80 अंक मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार मुरादाबाद का देश में छठवां और प्रदेश में तीसरा स्थान था। उसी के आधार पर एनजीटी ने लाल और नारंगी वर्ग में आने वाले नए उद्योग लगाने पर पाबंदी लगाई गई है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अजय कुमार शर्मा के अनुसार अब तक करीब 84 प्रदूषित औद्योगिक इकाईयां बंद करवाई जा चुकी हैं। नई प्रदूषणकारी इकाईयों की स्थापना और विस्तार पर रोक लगाई है। अब इस सीईपीआई स्कोर को सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण, नदी के डेटा, पौधेरोपण की स्थिति आदि की जानकारी मांगी गई है। यह रिपोर्ट मुरादाबाद के अलावा मथुरा, कानपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, गजरौला, गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़, आगरा आदि जैसे 13 औद्योगिक समूहों में बनवाई जा रही है। इसमें प्रदूषण को कम करने की कार्य योजना प्रस्तुत करनी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण में चार मार्च को सुनवाई की तारीख नियत है। इसलिए रिपोर्ट जिला पर्यावरण समिति से अनुमोदन के बाद उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जाएगी और वहां से इसे एनजीटी भेजा जाएगा।
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