अमरोहा जिले के डिडौली क्षेत्र के गांव सहसपुर अलीनगर के रहने वाले क्रिकेटर मोहम्मद शमी के पिता तौसीफ अहमद साधारण किसान थे। क्रिकेट की समझ रखने वाले तौसीफ गांव की टीम के तेज गेंदबाज थे। गांव के आसपास होने वाले टूर्नामेंट में भी खेला करते थे। वह अपने बेटे हसीब, शमी और कैफ को भी क्रिकेटर बनाना चाहते थे।
आज भले ही क्रिकेटर मोहम्मद शमी के पिता तौसीफ अहमद दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके जुनून ने गांव के शर्मीले सिम्मी (शमी के घर का नाम) को बल्लेबाजों पर कहर बरपाने वाला गेंदबाज बना दिया। बहुत कम लोग जानते होंगे कि तौफीफ ही पहले शख्स थे, जिन्होंने शमी में क्रिकेटर बनने का जब्जा देखा था।
विज्ञापन
इस जज्बे को पिता ने अपने जुनून की भट्ठी में तपाकर सिम्मी को क्रिकेटर मोहम्मद शमी बना दिया। अमरोहा जिले के डिडौली क्षेत्र के गांव सहसपुर अलीनगर के रहने वाले क्रिकेटर मोहम्मद शमी के पिता तौसीफ अहमद साधारण किसान थे। क्रिकेट की समझ रखने वाले तौसीफ गांव की टीम के तेज गेंदबाज थे।
गांव के आसपास होने वाले टूर्नामेंट में भी खेला करते थे। वह अपने बेटे हसीब, शमी और कैफ को भी क्रिकेटर बनाना चाहते थे। पड़ोसी गांव मूंढा के रहने वाले अरमान पाशा बतातें हैं कि शमी बड़े भाई हसीब का मैच देखने जाया करते थे। मूंढा और सहसपुर गांव के बीच जोगीपुरा में एक बार टूर्नामेंट चल रहा था। इस टूर्नामेंट में मैंने दो टीम उतारी थीं।
विज्ञापन
एक टीम में शमी को रखा गया था। दूसरे में हसीब। शमी वाली टीम का मुकाबला दीपपुर की टीम से था, जिसमें उन दिनों के मुरादाबाद के धाकड़ बल्लेबाज लाला मुशाहिद खेल रहे थे। शमी ने पहली गेंद पर ही लाला मुशाहिद की गिल्लियां बिखेर दी थीं। मैच में शमी का प्रदर्शन देख पिता तौसीफ को पहली बार अहसास हुआ कि उनका बेटा बड़ा क्रिकेटर बन सकता है।
यहीं से उन्हें शमी को क्रिकेटर बनाने का जुनून सवार हुआ। इस जुनून ने ही शमी को गांव की टीम से टीम इंडिया तक पहुंचाया। माली हालत ठीक न होने के बाद भी शमी को पहले मुरादाबाद खेलने भेजा। मेहनत के बाद भी शमी यूपी रणजी टीम में जगह नहीं बना पाए।
इससे पिता तौसीफ निराश हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कर्ज लेकर शमी को क्रिकेट खेलने के लिए कोलकाता भेजा। जहां से शमी ने पहले पश्चिम बंगाल की रणजी टीम में जगह बनाई। इसके बाद आईपीएल में केकेआर के सदस्य बने। यहीं से उन्हें टीम इंडिया का टिकट मिला।
मेरे पिता को क्रिकेट की अच्छी समझा थी। बड़ा होने के नाते चाहते थे कि मैं क्रिकेटर बनूं। मैं भी तेज गेंदबाजी करता था। उस वक्त शमी छोटे थे। मैं उतनी मेहनत नहीं कर सका। बाद में शमी के जज्बे को देखकर पिता ने उन्हें क्रिकेटर बनाने की ठान ली। आज पिता के जुनून, मां की दुआओं और अपनी मेहनत से शमी ने वह कर दिखाया, जो पिता चाहते थे। - मोहम्मद हसीब, क्रिकेटर मोहम्मद शमी के बड़े भाई
पिता की मौत से टूट गए थे शमी
शमी के पिता तौसीफ अहमद अपने गांव के प्रधान भी रहे थे। 26 जनवरी 2017 की रात वह खाना खाकर गांव में टहल रहे थे। इस दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और कुछ सयम बाद घर पर ही उनका निधन हो गया। निधन से दस दिन पहले ही गुरुग्राम से इलाज कराकर लौटे थे। पिता की मौत से शमी टूट गए थे। लेकिन पिता के सपने को पूरा करने की ललक काम आई। मेहनत और अभ्यास से वह क्रिकेट की दुनिया के चमकीले सितरों में शामिल हो गए।