मुरादाबाद। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए मील का पत्थर करार दिया है। ईपीसीएच का कहना है कि यह समझौता यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के बाजारों में भारतीय निर्यात की पहुंच को मजबूत करेगा और नए यूरोपीय बाजारों के द्वार खोलेगा। इसमें आर्ट मेटलवेयर, वुडक्राफ्ट, टेक्सटाइल आधारित हैंडीक्राफ्ट, फैशन ज्वेलरी, लाइफस्टाइल एक्सेसरीज और जीआई उत्पाद शामिल हैं जिनकी यूरोप में पहले से अच्छी मांग है।
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि यूरोपीय संघ भारतीय हस्तशिल्प का एक प्रमुख बाजार है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यूरोपीय संघ को 7309 करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात हुआ जो भारत के कुल हस्तशिल्प निर्यात का 20 प्रतिशत से अधिक है। एफटीए लागू होने के बाद इसमें और भी वृद्धि होगी। मुख्य संरक्षक और आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारतीय निर्यातक नए और अधिक मूल्य वाले बाजारों की तलाश में हैं। उपाध्यक्ष सागर मेहता और कार्यकारी निदेशक ने कहा कि यूरोपीय संघ एक हाई-वैल्यू बाजार है जहां गुणवत्ता, भरोसेमंद डिलीवरी और मानकों का पालन बेहद अहम है। डील से भारतीय शिल्प उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। ब्यूरो
- डील से मुरादाबाद के उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार
मुरादाबाद। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने डील का स्वागत किया और कहा कि इससे निर्यात आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर के द्वार खुलेंगे। यूरोपीय संघ में टैरिफ कम होने से भारतीय उत्पादों की कीमतें यूरोपीय बाजार में पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक होंगी। इससे मुरादाबाद के मेटलवेयर, गिफ्ट आइटम्स और होम डेकोर उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ब्यूरो