यही नहीं, तीन दिन बाद चंद्रशेखर सीतापुर जेल पहुंच गए। जहां आजम खां से उनकी एक घंटे बातचीत हुई। मुलाकात के बाद चंद्रशेखर का बयान सोशल मीडिया पर छाया रहा। आजम खां और उनके परिवार के सदस्यों से यह मुलाकात सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। सियासी कयासबाजी भी शुरू हो गई।
इस बीच दस दिसंबर को आजम खां ने संभल की घटना को लेकर इंडिया गठबंधन पर निशाना साधकर राजनीतिक बदलाव के संकेत को हवा दे दी। जेल से जारी बयान में आजम ने यहां तक कहा कि जब रामपुर में जुल्म और बर्बादी हुई तो इस मुद्दे को उतनी मजबूती से संसद में नहीं उठाया गया, जितना संभल का मुद्दा उठाया जा रहा है।
अब आजम के बयान और चंद्रशेखर की मुलाकात को जोड़कर राजनीतिक चर्चाएं बढ़ गई हैं। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सपा पर दबाव या दल-बदल के संकेतों पर दो खेमों में नाइत्तफाकी हो सकती है लेकिन आने वाले दिनों में मुस्लिम सियासी धारा के मुखर स्वरूप को सभी तय मान रहे हैं।
रामपुर में लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का किया था एलान
लोकसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव और आजम खां आमने-सामने आ गए थे। मुरादाबाद मंडल में प्रत्याशियों के चयन से पहले अखिलेश यादव ने आजम खां से सीतापुर जेल में मुलाकात की थी। आजम खां ने अखिलेश यादव को रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। साथ ही मुरादाबाद सीट से बिजनौर की पूर्व विधायक रुचिवीरा को प्रत्याशी बनाने की सिफारिश की थी। अखिलेश यादव ने टिकट वितरण के समय ऐसा नहीं किया। इसके बाद आजम खां के हवाले से रामपुर के सपा नेताओं ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान कर दिया था। इस खींचतान के बीच अखिलेश यादव ने आजम की पसंद को दरकिनार कर दिल्ली पार्लियामेंट्री स्ट्रीट की मस्जिद के इमाम मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी को रामपुर से उम्मीदवार घोषित कर दिया था। हालांकि मुरादाबाद सीट पर उस समय के मौजूदा सांसद डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर रुचिवीरा को उम्मीदवार बनाते हुए आजम खां को बैलेंस करने की कोशिश भी की थी। संयोग से दोनों सीटें (रामपुर, मुरादाबाद) सपा के खाते में आने से असंतुष्टि की भीतरी आग को ज्यादा हवा नहीं मिल सकी थी लेकिन अब स्थितियां फिर बदली हैं।
तंजीन फात्मा से मिलकर अखिलेश ने आजम के हितैषी होने का दिया था संदेश
उपचुनाव में कुंदरकी में सभा के बाद अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे थे। वहां वह सिर्फ आजम खां के घर गए और उनके परिजनों से मुलाकात की थी। समय-समय पर आजम खां के साथ सरकारी स्तर से जुल्म-ज्यादती की बात कहकर इस परिवार के हितैषी होने का संदेश भी देते रहे हैं। यह भी कहा था कि सपा सरकार आने पर आजम खां के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
एआईएमआईएम प्रमुख भी कर सकते हैं आजम से मुलाकात
चर्चा है कि जल्द ही एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी आजम खां से जेल में मुलाकात कर सकते हैं। वह भी रामपुर और संभल पर बयान देने में पीछे नहीं रहे हैं।
पहले भी आजम कर चुके हैं सपा से बगावत
आजम खां की सपा से नाराजगी कोई नई बात नहीं है। आजम खां पहले भी पार्टी से बगावत कर चुके हैं। वर्ष 2010 में पार्टी से अलग हो गए थे। उनके समर्थकों ने आजमवादी मंच बनाया था। बाद में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मना लिया था। इसके बाद 2012 सपा बहुमत के साथ सरकार में आई थी।
सियासी घटनाक्रम
- 11 नवंबर को चंद्रशेखर ने हरदोई जेल में अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की थी
- 17 नवंबर को चंद्रशेखर आजम खां की पत्नी और बेटे से मिलने रामपुर पहुंचे
- 21 नवंबर को चंद्रशेखर सीतापुर जेल में आजम खां से मिले
- 10 दिसंबर को आजम खां ने सीतापुर जेल से अपना बयान जारी किया