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Moradabad News: अस्पताल की अधूरी दीवार, फंसा हस्तांतरण, शुरू नहीं हो रहा उपचार

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अगवानपुर। एक दशक के बाद अगवानपुर में तैयार हुए आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक अस्पताल का हैंडओवर बजट की कमी में फंस गया है। अल्पसंख्यक विभाग के पास अस्पताल की अधूरी दीवार को पूरा बनाने के लिए बजट नहीं है। दूसरी ओर बिना बाउंड्रीवाल तैयार हुए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं।
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यह अस्पताल अक्तूबर 2024 से बनकर तैयार है लेकिन, इस समस्या का हल नहीं मिल रहा है। अब तक बजट की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां के लोग छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए झोलाछाप पर निर्भर हैं। अगवानपुर के कांवड़ मार्ग स्थित धर्मकांटे के सामने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव 2012 में पास हुआ। शासन ने दोनों अस्पताल के निर्माण के लिए 17 लाख का बजट दिया। प्रशासन ने अस्पतालों की देखरेख का जिम्मा अल्पसंख्यक विभाग को सौंपा था। एक दशक में निर्माण अंतिम चरण में पहुंचा तो कानूनी दांवपेच भी सामने आए। कस्बे के कुछ लोगों ने अस्पताल की जमीन पर दावा कर कोर्ट जाने की धमकी दी। इससे अधिकारियों की रुचि कम हो गई और अस्पताल का निर्माण बीच में ही रुक गया। अप्रैल 2024 में अधूरे अस्पताल की खबरों के बाद तत्कालीन एडीएम सदर ने भूमि की नापतोल कराई। इसमें जमीन सरकारी सिद्ध हुई और निर्माण पूरा हो पाया।

उधार के भवनों में संचालित अस्पताल
अगवानपुर बाईपास स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच साल से आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पताल संचालित है। यह भवन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक को भवन उधार दिए गए हैं। अस्पताल के दोनों ही भवन टूटे हैं। लिंटर जर्जर है और कर्मचारी जान जोखिम में डालकर यहां नौकरी कर रहे हैं।
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50 हजार से अधिक की आबादी को मिलेगा लाभ

अगवानपुर में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक के अस्पताल बनने से कस्बे की करीब 50 हजार की आबादी को लाभ मिलेगा।इसके अलावा आसपास के गांवों के लोग भी इसका फायदा उठाएंगे। वहीं अस्पताल के शुरू होने से बाईपास स्थित अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। इससे मरीजों को घर के पास सुविधा मिलेगी। किराये के रुपयों के साथ समय भी बचेगा।





निर्माण करने वाले जई ने अस्पताल को हैंडओवर करने की बात की थी लेकिन अस्पताल की बाउंड्रीवाल अधूरी है। जब तक बाउंड्री पूरी नहीं होगी तब तक अस्पताल को हैंडओवर नहीं लिया जाएगा। बाउंड्री के लिए कमिश्नर, डीएम और अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

- डॉ. अमरदीप सिंह नायक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी


अस्पताल के निर्माण में लगे 12 वर्ष बजट की कमी का कारण हैं। अब बाउंड्री के लिए बजट नहीं है। बिना बाउंड्री वाल के अस्पताल को अपने दायित्व में लेने से आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी मना कर रहे हैं। मामले की जानकारी डीएम और सीडीओ को दी गई है।
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- दिलीप कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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