वैसे तो इस तपिश भरी गर्मी में डाक्टर हर मरीज को खूब पानी पीने की सलाह देते हैं, लेकिन कुछ मरीज ऐसे भी जिनके लिए अधिक पानी खतरनाक होता है। जी हां, कमजोर दिल के मरीजों को इस रिकार्ड तोड़ गर्मी में अपना वाटर मैनेजमेंट स्ट्रांग करने की जरूरत है। वरना लापरवाही उन्हें अस्पताल का रास्ता दिखा सकती है।
तपिश और उमसभरी गर्मी में हर किसी मेें पानी की तलब बढ़ जाती है। चार कदम धूम में चलने पर गला सूखने लगता है। जहां आम दिनों में एक बार में एक गिलास पानी में काम चल जाता था, वहां इन दिनाें दो से तीन गिलास पानी की जरूरत पड़ती है। फिर भी गले की तरावट नहीं हो पाती है। लेकिन कमजोर दिल के मरीजों में बढ़ी पानी डिमांड उनके लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
डाक्टरों के मुताबिक अटैक, इंफेक्शन और ओवर ऐज में दिल सुचारु रूप से काम नहीं करता है। हार्ट का पंपिंग सिस्टम बिगड़ सा जाता है। ऐसे मरीजों को सर्दी हो या गर्मी पानी के सेवन में एहतियात बरतना होता है। खासकर गर्मियों में। क्योंकि इस मौसम में मरीज कई बार पानी पीता है, जो एक जगह इकट्ठा हो जाता है। जहां से दिल पंपिंग के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों में भेजा है।
लेकिन हार्ट कमजोर होने से पंपिंग सिस्टम प्रभावित होती है। नतीजतन पानी की खपत नहीं हो पाती है। धीरे-धीरे पंप काम करना बंद करने लगता है। इस दौरान मरीज को सांस लेने तकलीफ होती है। ऐसे में कमजोर दिल के मरीज को अपने वाटर सिस्टम में अधिक फोकस करना चाहिए।