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Moradabad News: मैं हूं डॉन... पर जमकर थिरके शहर के डॉक्टर

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मुरादाबाद। अरे दीवानों मुझे पहचानो, कहां से आया, मैं हूं कौन..., मैं हूं डॉन, मैं हूं डॉन। अपने क्लीनिक पर बेहद संजीदगी और गंभीरता से बच्चों का इलाज करने वाले डॉक्टर अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन के इस सदाबहार गीत पर जमकर थिरकते नजर आए। मौका था एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की मुरादाबाद शाखा के दिवाली उत्सव का।
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दिल्ली रोड स्थित एक होटल में यह आयोजन धूमधाम से किया गया। शहर के तमाम बाल रोग विशेषज्ञ अपने परिवार के साथ आयोजन में पहुंचे। उन्होंने दिवाली क्विज, हाउजी, तंबोला आदि खेलों से मनोरंजन किया। डॉक्टरों के बच्चों व पत्नियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद डॉक्टरों ने स्टेज पर जमकर धमाल मचाया। डॉक्टर जोड़ों ने रैंप वॉक से मंच पर जलवा बिखेरा। कार्यक्रम में डॉक्टरों का अलग ही रूप देखने को मिला।
दिवाली थीम पर सभी पारंपरिक परिधान पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे थे। सभी ने एक दूसरे को उपहार देकर दिवाली की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल, आईएमए की अध्यक्ष डॉ. प्रीति गुप्ता, सचिव डॉ. सुदीप कौर, कोषाध्यक्ष डॉ. रूबी चुग, डॉ. रवि गंगल, डॉ. बीके दत्त, डॉ. शलभ अग्रवाल, एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. केजी गुप्ता, सचिव डॉ. प्रशांत पांडे व कोषाध्यक्ष डॉ. शिवांक माहेश्वरी आदि मौजूद रहे।
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डॉ. बीके दत्त को लखनऊ में मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके दत्त को इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की उत्तर प्रदेश बॉडी की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। डॉ. दत्त को पीडियाट्रिक्स में उनकी लंबी सेवाओं के लिए यह पुरस्कार मिला। पुरस्कार के लिए उत्तर प्रदेश से पांच बाल रोग विशेषज्ञों का चयन किया गया था। इसमें डॉ. दत्त भी शामिल हैं। वहीं एओपी की गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए डॉ. शलभ अग्रवाल, डॉ. रवि गंगल, डॉ. केजी गुप्ता को भी सम्मान मिला। डॉ. शलभ एओपी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष व सचिव पद पर रहने वाले मुरादाबाद के अकेले डॉक्टर हैं। डॉ. दत्त समेत चारों बाल रोग विशेषज्ञों को दिवाली उत्सव में भी सम्मानित किया गया।
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दो साल तक बच्चों को न दिखाएं मोबाइल : डॉ. बीके दत्त (फोटो)
आजकल माता-पिता बच्चों के जरा सा रोने पर उन्हें मोबाइल थमा देते हैं। दो साल तक बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप बिल्कुल दिखाएं। पांच साल की उम्र तक बच्चा जो स्क्रीन पर देखता है, उसे वास्तविक समझता है। यह उनके मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव डालता है। छह साल से बड़ी उम्र के बच्चे मोबाइल देखें, तो भी परिजन ध्यान रखें कि वह क्या देख रहे हैं। शुरू से जंक फूड के स्थान पर घर का खाना खिलाना सिखाएं।
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जन्म के एक घंटे के भीतर पिलाएं मां का दूध : डॉ. शलभ अग्रवाल (फोटो)
बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध जरूर पिलाएं। इससे बोतल की आदत नहीं लगेगी और बच्चा मां से लगाव रखेगा। मां का दूध बच्चे के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। यदि किसी वजह से बोतल से दूध पिला रहे हैं तो तीन से चार बोतल रखें और इस्तेमाल के बाद बोतल को पानी में उबालकर साफ करें। डॉक्टर की सलाह से दूध की मात्रा तय करें।
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