रामपुर जनपद के शाहबाद निवासी जोगेंद्र ने संभल के कुढ़फतेहगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया था कि उसकी छोटी बहन की शादी वीरेश पुत्र किशन पाल के साथ साल 2011 में हुई थी। शादी के बाद से ही उसके पति वीरेश, ससुर किशन पाल और ननद खुशबू आये दिन दहेज के लिए मेरी बहन को परेशान करते थे। 2 जुलाई 2015 को मैं अपनी बहन से मिलने के लिए उसकी सुसराल गया था। वहां न तो मेरी बहन खुशबू मिल और न ही बहनोई वीरेश था। जोगेंद्र ने अपनी बहन के ससुर किशन पाल से पूछताछ की तो उसने बताया था कि वीरेश और खुशबू बाहर गए हैं जबकि गांव में चर्चा थी कि वीरेश और अन्य लोगों ने मिलकर खुशबू की हत्या कर दी है। अब तक महिला जिंदा मिली और न ही उसकी लाश मिली।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता समर्थ शुक्ला ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और मुकदमे की विवेचना करते हुए आरोप पत्र वीरेश के खिलाफ अदालत में पेश किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या आठ अरुण कुमार की अदालत में की गई। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पति को अपनी पत्नी के अपहरण का दोषी पाते हुए उसे सात साल के कारावास की सजा के साथ उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।