संभल के चंदौसी नगर से करीब चार किलोमीटर दूर ब्लॉक बनियाखेड़ा की ग्राम पंचायत मोहम्मदनगर कस्बा के मझरा गनेशपुर में 140 साल पुराना प्राचीन मनोकामना मंदिर है। जिसमें एक विशाल मनोकामना कुंड है। जहां गंगा देवी का मंदिर भी है। फिलहाल मनोकामना कुंड जीर्णोद्धार के लिए राह देख रहा है।
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ग्रामीण लंबे समय से मनोकामना कुंड के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं। ग्राम पंचायत मोहम्मदनगर कस्बा के दो मझरे गनेशपुर और खुशहालपुर हैं। गांव गनेशपुर से चंदौसी की दूरी करीब चार किलोमीटर है। गनेशपुर में सन् 1884 का प्राचीन मनोकामना मंदिर है।
ये मंदिर बीस बीघा जमीन पर बना है। जिसमें राधाकृष्ण का मंदिर और शिवालय के अलावा मनोकामना कुंड है। कुंड में एक गंगा देवी मंदिर है। विशाल कुंड में चारों ओर सीढि़यां हैं। ऊपर बरामदा है।
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बताया जाता है कि 150 वर्ष पहले मुरादाबाद के एक जमींदार ने मंदिर में विराजे ठाकुर जी (राधाकृष्ण) के नाम 100 बीघा जमीन नाम कर दी थी। बीस बीघा भूमि में प्राचीन मनोकामना मंदिर और कुंड बना है। बाकी 80 बीघा खेती की भूमि गांव के आसपास है।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में बना कुंड मंदिर से पहले का है। इस कुंड में 35 साल पहले तक पानी रहता था। कुंड में 32 गोले बने हैं। जिनसे पानी आता था। 1995 में जलस्तर गिरने से पानी आना बंद हो गया।
मान्यता : कुंड में स्नान करने से चर्म रोग होते थे दूर, मनोकामना होती है पूरी
मनोकामना मंदिर परिसर में बने विशाल कुंड में वर्ष 1995 तक पानी था। मान्यता है कि यहां कुंड में स्नान के लिए दूर गांव से लोग आते थे। कुंड में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते थे और अन्य मनोकामना पूरी होती थी।
मनोकामना मंदिर परिसर में बना कुंड मंदिर की धरोहर है। यहां बचपन में 35 साल पहले कुंड में पानी देखा गया था और लोग स्नान करते थे। कुंड का जीर्णोद्धार हो जाए तो ये पर्यटन स्थल बन सकता है। -रामवीर सिंह, ग्रामीण गांव गनेशपुर
यहां जन्माष्टमी पर 3 दिवसीय मेला लगता है। जिसमें मथुरा के कलाकार आते थे। मंदिर परिसर में बना कुंड ऐतिहासिक धरोहर की तरह है। इसे जीवंत किया जाना महत्वपूर्ण है। शासन व प्रशासन इस ओर ध्यान दे। -नेमचंद मौर्य, ग्राम प्रधान, मोहम्मदनगर कस्बा
35 साल पहले कुंड में पानी आना बंद हो गया। शासन व प्रशासन को इस धरोहर को अपने कब्जे में कर जीर्णोद्धार कराना चाहिए। -देशपाल मौर्य, मोहम्मदनगर कस्बा
ये मंदिर रजिस्टर्ड मंदिर है। बताया जाता है कि जन्माष्टमी मेले के लिए इस मंदिर के लिए शासन से अनुदान भी मिलता है। मंदिर की देखरेख सही से हो जाए तो ये पर्यटन स्थल भी बन सकता है। शासन व प्रशासन इस ओर ध्यान दे। -सेवाराम, मोहम्मदनगर कस्बा