रानी सुरेंद्रबाला और विष्णु कुमार उर्फ लल्ला बाबू
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चार सौ से ज्यादा गांव थे रियासत में
सहसपुर राजघराने की सदस्य और पूर्व मंत्री रानी रीना कुमारी ने फोन पर बताया कि उनके परिवार की रियासत बदायूं, मुरादाबाद, बिजनौर और संभल के चंदौसी समेत चार सौ से ज्यादा गांव में थी। चंदौसी में भी उनके परिवार की संपत्ति थी। जिसमें बावड़ी मिली है।
जगदीश सरन,रीना कुमारी और शिप्रा गेरा
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उनकी नानी रानी प्रीतम कुंवर के पति और उनके नाना राजा जगत सिंह की थी। 19 वर्ष की आयु में वर्ष 1934 में अलीगढ़ जाते समय कार दुर्घटना में राजा जगत सिंंह की मृत्यु हो गई थी। वर्ष 1982 में नानी का निधन हो गया। उससे पहले नानी ने ये चंदौसी की संपत्ति अपनी पुत्रवधू सुरेंद्र बाला के नाम कर दी थी।
उठा सवाल, क्या बावड़ी काे पुरातात्विक धरोहर घोषित करेगा प्रशासन
लक्ष्मण गंज में मिली बावड़ी को पुरातात्विक धरोहर घोषित किया जाएगा क्या, आम जनमानस के बीच में यह सवाल उठ रहा है। सुरेंद्रबाला की पोती शिप्रा गेरा का भी कहना है कि यदि प्रशासन बावड़ी को ऐतिहासिक धरोहर घोषित करता है तो ये चंदौसी के लिए सौभाग्य की बात होगी।
खोदाई में निकला सुरंग जैसा गलियारा
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बावड़ी से जुड़े तीन मंजिला भवन के भी संकेत
डीएम बताया कि अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रूप में दर्ज है। बिलारी के राजा के परिवार के समय यहां बावड़ी बनी थी। इसमें तीन मंजिल भवन के संकेत भी मिले हैं। दो मंजिल संगमरमर से बनी हैं। एक मंजिल ईंटों से बनी है। इसमें कुआं भी है और चार कक्ष बने हैं।
ये बावड़ी 150 साल पुरानी बताई जा रही है। डीएम ने बताया कि जरूरत पड़ी तो पुरातत्व निदेशालय की टीम को पत्र भेजा जाएगा। डीएम ने बताया कि बावड़ी के कुछ समय पूर्व मिले मंदिर का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। जिससे लोग वहां पूजा कर सकें। इसके लिए अतिक्रमण भी हटाया जाएगा।