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स्विट्जरलैंड में ऐसी प्रेरणा मिली की गरीब बच्चों के लिए घर को बना दिया स्कूल-00

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रामपुर। अगर किसी व्यक्ति को किसी काम की कहीं से प्रेरणा मिल जाए तो वह उस कार्य को पूरा करके छोड़ता है। चाहे उसके लिए कितनी भी कठिनाई क्यों न आ जाए। सेवानिवृत्त बैंक अफसर अचल राज पांडे को स्विट्जरलैंड में ऐसी प्रेरणा मिली कि उन्होंने वापस आकर गरीब बच्चों खासतौर पर गरीब बच्चियों को शिक्षा देेने के लिए अपने घर को ही विद्यालय बना डाला। छह साल से वह गरीब बच्चों को घर पर बनाए गए स्कूल में ट्यूशन दे रहे हैं। सेवानिवृत्त बैंक अफसर की शिक्षक पत्नी दया पांडे ने भी इस मुहिम में अपने पति का साथ दिया और वह भी पति के साथ गरीब बच्चों को शिक्षा देने लगीं। पिछले साल कोरोना के कारण पत्नी की मौत होने के बाद भी सेवानिवृत्त बैंक अफसर ने हौसला नहीं छोड़ा और गरीब बच्चों को शिक्षित करने का अभियान चला रहे हैं।
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डायमंड सिनेमा स्थित गायत्रीपुरम के रहने वाले अचल राज पांडे भारतीय स्टेट बैंक में एजीएम के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्त होने के बाद वह स्विट्जरलैंड घूमने के लिए गए। स्विट्जरलैंड में उन्होंने एक स्कूल के बाहर नोटिस बोर्ड देखा। जिस पर शिक्षा में रुचि रखने वाले लोग खाली समय में स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए समय और विषय लिखते थे। नोटिस बोर्ड पर लिखे गए समय के अनुसार वह स्कूल में बच्चों की क्लास लेते थे। इस नोटिस बोर्ड से सेवानिवृत्त बैंक अफसर को ऐसी प्रेरणा मिली की उन्होंने घर आकर गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने की ठान ली।
स्विट्जरलैंड से वापस आने के बाद सेवानिवृत्त बैंक अफसर ने पत्नी के साथ मिलकर अपने घर को ही स्कूल बना दिया। छह साल से वह बच्चों खासतौर पर गरीब परिवारों की बालिकाओं को रोजाना शाम 4 से 6 बजे तक निशुल्क ट्यूशन दे रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने शहर के स्कूलों के संपर्क कर गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के संकल्प के बारे में बताया। सेवानिवृत्त बैंक अफसर प्रतिवर्ष 12 से 15 गरीब बच्चों की फीस के साथ स्कूल ड्रेस, किताबें समेत पढ़ाई का पूरा खर्चा उठा रहे हैं। छह साल में वह 150 से ज्यादा गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठा चुके हैं।
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सेवानिवृत्त बैंक अफसर अचल राज पांडे के यहां प्रत्येक वर्ष 50 से 60 बच्चे विभिन्न स्कूलों में पढ़ने के साथ ट्यूशन भी पढ़ते हैं। गणित विषय में पारंगत सेवानिवृत्त बैंक अफसर बच्चों को गणित की ट्यूशन देते हैं। वहीं, उनकी पत्नी दया पांडे और एक अन्य शिक्षिका पूनम गुप्ता अन्य विषयों की ट्यूशन देती थीं। पिछले वर्ष कोरोना में दया पांडे की मृत्यु होने के बाद अब सेवानिवृत्त बैंक अफसर शिक्षिका पूनम गुप्ता के साथ मिलकर गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के कार्य को अंजाम दे रहे हैं। बालिकाओं को ट्यूशन के साथ विभिन्न तरीके के कोर्स कराकर उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए तैयार किया जाता है।
इसके अलावा सेवानिवृत्त बैंक अफसर ग्रामीण अंचल में परिषदीय स्कूलों में जाकर बच्चों व स्टाफ को सफाई और शिक्षा के बारे में बताते हैं। साथ ही बच्चों के हाथ धोने के लिए साबुन और बच्चों के खाने पीने की वस्तुएं भेंट करते हैं। ग्रामीण अंचल के बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिले, इसके लिए वह तीन स्कूलों को प्रोजेक्टर दान कर चुके हैं।
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