मुरादाबाद। हवा से बात करते रोनाल्ड और मोंटीना। तूफान सरीखे फर्राटा भरते पोरस और रिमझिम। जिसने देखा, शाबास बोल उठा। यह नजारा था पुलिस अकादमी में चल रही घुड़सवारी प्रतियोगिता का जिसमें जोश और जज्बे ऐसा अनूठा मिश्रण दिखाई दिया दिया। इन घोड़ों ने सभी को मात दी और पदकों पर कब्जा जमाया। इस दिन भी प्रतियोगिता में मुरादाबाद सब पर भारी पड़ा।
डा. बीआर अंबेडकर पुलिस अकादमी के मैदान में चल रही 22 वीं पुलिस घुड़सवारी प्रतियोगिता में तीसरे दिन भी मुरादाबाद के घोड़ों और सवारों का जलवा बरकरार रहा। शो जंपिंग मीडियम टॉप स्कोर में मुरादाबाद प्रशिक्षण जोन ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इसमें मुरादाबाद प्रशिक्षण जोन के मुकेश बाबू ने पोरस एवं रिमझिम पर सवार होकर प्रथम व द्वितीय स्थान हासिल कर स्वर्ण व रजत पदक जीता। जबकि राजनरेश ने अनंत के साथ कांस्य पदक एवं प्रेम बाबू ने दक्ष के साथ चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।
शो जंपिंग मीडियम नॉर्मल प्रतियोगिता में प्रशिक्षण जोन के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। जिसमें भगवान सिंह ने मोंटीना के साथ प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक, राज नरेश ने हीरो के साथ रजत पदक और मुकेश बाबू ने रिमझिम के साथ कांस्य पदक जीता। साईस कंप्टीशन में लखनऊ जोन के प्रदीप कुमार शुक्ला ने रोनाल्ड के साथ प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। प्रशिक्षण जोन के सुधार ने दक्ष के हासिल कर रजत पदक और आगरा जोन के हरिकिशन ने चेतन के साथ कांस्य पदक जीता है। इस दौरान निर्णायक मंडल में सेवा निवृत्त कर्नल सुशील बलवाडा, बीएस लाकरा और कोर्स डिजाइजर एकलव्य शर्मा भूमिका निभाई। हे।
छह माह में घोड़ा, नौ माह तैयार होता है घुड़सवार
मुरादाबाद। घोड़ों पर सवाल होकर व्यवस्था बनाती माउंटेड पुलिस घुड़सवारी प्रतियोगिता के लिए भी पसीना बहाती है। एक घोडे़ को तैयार करने में छह माह का समय लगता है जबकि उसके घुड़सवार को नौ माह का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाता है।
प्रशिक्षण के लिए तीन से पांच साल तक के घोड़ों को खरीदा जाता है। इनका अधिकतम 20 साल की आयु तक पुलिस द्वारा पेट्रोलिंग और प्रतियोगिताओं में इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस द्वारा घोडे़ फर्मों से खरीदे जाते हैं, इनमें देसी घोड़े की तीन प्रजाति अमृतसरी, भैरो और काठियाबाड़ी है। ये घोडे़ 60 से 80 हजार रुपये तक में पुलिस को मिल जाते हैं जबकि हाफब्रिड और थैरो प्रजाति के घोड़े 1.60 लाख रुपये से 1.80 लाख रुपये तक में खरीदे जाते हैं। दो घोड़ों की देखभाल के लिए एक साईस होता है जो कि उनकी निगरानी करता है।
रेत में लोटपोट होने से होती दूर होती है थकान
मुरादाबाद। घोड़े की देखभाल करना आसान नहीं है। लंबे समय से पुलिस अकादमी में घोड़ों की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे साईस ओमप्रकाश ने बताया कि बताया कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठते हैं। इसके बाद घोड़ों को साफ सुथरा कर तैयार किया जता है। सुबह छह बजे उनको परेड के लिए लाया जाता है। परेड़ के बाद उनको वापस अस्तबल में लाया जाता है। यहां पर उनको रेत में लिटाया जाता है। मालिश की जाती है, जिससे कि उनकी थकान मिट सके। सेंड बाथ कराने के बाद उनको करीब साढे़ सात बजे खाना दिया जाता है। दोपहर में डेढ़ बजे दोबारा खाना दिया जाता है। फिर मालिश की जाती है। शाम को चार बजे उनको दोबारा परेड के लिए ले जाया जाता है। परेड़ से लाने के बाद दोबारा घोड़ों को रेत में लिटाया जाता है। फिर उनकी मालिश की जाती है। जिससे की उनके शरीर में किसी तरह की गंदगी न रहे। देर शाम करीब साढे़ सात बजे उनको तीसरी बार खाना दिया जाता है। इसके बाद उनको सोने के लिए छोड़ दिया जाता है।
ये है प्रतिदिन खाना.. चना और गुड़ काफी पसंद
मुरादाबाद। एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक, 100 ग्राम तेल, 100 ग्राम गुड़, 25 किलो घास एक घोड़ा रोजाना खाता है। घोड़ों को चना ओर गुड़ काफी पसंद हैं।