मुरादाबाद। शासन स्तर से गठित जांच समिति की आख्या के आधार पर निलंबित किए गए ग्राम विकास अधिकारी रामप्रकाश द्वारा निलंबन आदेश के विरुद्ध दायर याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मुरादाबाद निवासी एक जनहित कार्यकर्ता द्वारा हाईकोर्ट के संज्ञान में पूरा मामला लाने के बाद कोर्ट ने रामप्रकाश को दोबारा इस आदेश के विरुद्ध याचिका दायर करने की स्वतंत्रता भी नहीं दी है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायत में नियुक्त किए गए प्रशासकों के कार्यकाल में जनपद मुरादाबाद में करीब 38 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। अमर उजाला द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाया गया तो शासन स्तर से गठित पांच सदस्यीय समिति द्वारा मूढ़ापांडे और कुंदरकी की 10-10 ग्राम पंचायतों में जांच किए जाने पर तमाम वित्तीय अनियमितताएं और शासकीय धन के गबन का मामला प्रकाश में आया। इस जांच आख्या के आधार पर नौ ग्राम पंचायत सचिवों, दो एडीओ पंचायत समेत तत्कालीन डीपीआरओ को शासन के आदेश पर निलंबित किया गया। ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित किए जाने से पूर्व डीपीआरओ ने डीएम से अनुमोदन प्राप्त नहीं किया और इसी को आधार बनाकर ब्लॉक मूंढापांडे के ग्राम पंचायत अधिकारी अथर फहीम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की और स्टे ले लिया।
इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी रामप्रकाश सिंह के द्वारा भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने निलंबन आदेश के विरुद्ध इसी आधार पर याचिका दायर की गई, लेकिन मामले में जनहित कार्यकर्ता इम्तियाज हुसैन के अधिवक्ता शैलेश पांडे ने न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान पूरे प्रकरण से न्यायालय को अवगत कराया तो याची रामप्रकाश के अधिवक्ता ने न्यायालय से याचिका वापस लेते हुए खारिज करा ली। लेकिन याची को इस निलंबन आदेश के विरुद्ध पुन: याचिका दायर करने की स्वतंत्रता हाईकोर्ट ने नहीं दी। इस आदेश के बाद ग्राम विकास अधिकारी रामप्रकाश की मुश्किल भी अब और बढ़ गई है।