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कोरोना के कहर से सब थे दंग तब इन्होंने जीती जंग

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मुरादाबाद। कुछ माह पहले जब कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था। महामारी को लेकर लोगों में बहुत ज्यादा भय व्याप्त था और लॉकडाउन के चलते सभी अपने घरों में कैद थे। कोरोना से पीड़ित होने पर युवा और प्रौढ़ वर्ग के लोगों में मानसिक तनाव उत्पन्न हो गया था, तब मुरादाबाद शहर में रहने वाले बुजुर्गों ने समाज को साहस दिया था।
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कोरोना संक्रमित होने पर बुजुर्गों ने न सिर्फ हिम्मत से काम लिया बल्कि छह दिन में महामारी को धूल चटाई और स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट गए। इनमें मुरादाबाद शहर की दो महिलाएं 100 वर्षीय शांति देवी और 93 वर्षीय किरण शर्मा शामिल हैं। इसके अलावा 97 वर्षीय रामरती देवी अमरोहा और सबसे ज्यादा उम्रदराज व्यक्ति 103 वर्षीय पवन कुमार मिश्रा संभल के रहने वाले हैं। हालांकि इनका इलाज मुरादाबाद में हुआ और जल्द ही स्वस्थ हो गए। जब हर आयु वर्ग के लोगों में कोरोना को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां थीं, उस समय इन शख्सियतों ने कोरोना को हराने के बाद अपने अनुभव साझा किए। इससे समाज में भ्रांतियां कम हुईं और कोरोना का सामना करने के लिए लोगों को साहस मिला। इन्होंने अपनी पुरातन जीवन शैली, ध्यान और योग के माध्यम से मात्र छह से 12 दिन में कोरोना को हरा दिया।
मैं भगवान में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं। ज्यादातर समय धार्मिक यात्राएं करने में ही बीतता है। 22 सितंबर को मेरी कोरोना जांच रिपोर्ट पाजिटिव आई और मुझे टीएमयू में भर्ती किया गया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मैंने हिम्मत बनाए रखी और हर समय ईश्वर का ध्यान किया। यही वजह रही कि मैं 12 दिन में स्वस्थ हो गया और पांच अक्तूबर को मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। - पवन कुमार मिश्रा, उम्र 103 वर्ष
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बेटा कोरोना संक्रमित हुआ तो पूरे परिवार की जांच कराई गई। इसमें मेरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। भर्ती होने के समय आक्सीजन लेवल बेहद कम था और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। रेलवे अस्पताल में डॉक्टरों में घर जैसा माहौल उपलब्ध कराया। प्रशासन ने मेरे लिए अलग से खाने की व्यवस्था की। प्रभु स्मरण से शक्ति मिली और छह दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल गई। - शांति देवी, उम्र 100 वर्ष
कोरोना के चलते मेरे बेटे का देहांत हो गया। इसके बाद पूरे परिवार को क्वारंटीन किया और मेरी रिपोर्ट भी पाजिटिव आई। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मैंने अपनी दिनचर्या समान बनाए रखी। रोजाना सुबह जल्दी उठकर ईश्वर का ध्यान किया और हिम्मत नहीं हारी। भगवान के स्मरण से ही मुझे ऊर्जा मिली और मात्र पांच दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई। - रामरती देवी, उम्र 97 वर्ष
पूरा जीवन धार्मिक माहौल में व्यतीत हुआ है। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी सिर्फ भगवान का ध्यान किया और भगवत गीता सुनी। बेटा भी कोरोना से संक्रमित था। रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों ने मेरी सहूलियत के लिए बेटे का बेड भी बराबर में लगाया। डॉक्टरों ने महसूस नहीं होने दिया कि मैैं अस्पताल में हूं। अच्छी देखरेख के चलते केवल सात दिन में मैं और बेटा पूरी तरह स्वस्थ होकर घर वापस आ गए। - किरण शर्मा, उम्र 93 वर्ष
बिजनौर निवासी दीप शर्मा के बेटे हार्दिक शर्मा को 27 सितंबर को टीएमयू में भर्ती किया गया था। उस समय वह मासूम सिर्फ चौदह दिन का था। उस बालक ने मात्र छह दिन में कोरोना को हराया और तीन अक्तूबर को अस्पताल से अपने परिवार के साथ घर लौट गया। दीप शर्मा ने बताया कि उनकी माता जी का कोरोना संक्रमण के कारण देहांत हो गया, इसके बाद परिवार में सबकी जांच हुई तो उतनी पत्नी, बेटा, पिता और सास भी पाजिटिव पाए गए। सभी को अस्पताल में भर्ती किया गया था। अब सभी स्वस्थ्य हैं, दीप शर्मा ने बताया कि अन्य सदस्यों के मुकाबले हार्दिक जल्दी रिकवर हो गया।
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