सरकारी सिस्टम भी कमाल है। जिस फाइल को पास कराने के लिए रिटायर्ड प्रधानाचार्य हरद्वारी लाल ने छह माह तक दिन रात एक कर दिया था। दफ्तरों के चक्कर लगाते लगाते पैरों की चप्पल तक टूट गईं। अफसर से लेकर नेता की चौखट तक हरद्वारी ने गुहार लगाई, पर फाइल बाबुओं की टेबल पर फंसी रही।
मंगलवार को हरद्वारी की मौत के बाद ये फाइल चंद मिनटों में पास हो गई। अफसर संजीदा हो गए और नेताओं को भी फर्ज याद आ गया। न केवल फाइल पास हुईं बल्कि पूरा का पूरा पेमेंट हरद्वारी के घर पहुंच गया।
मझोला थानाक्षेत्र के लाइन पार पुतली घर रोड निवासी हरद्वारी लाल नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल में प्रिंसिपल थे। 30 जून 2015 को उन्हें रिटायर्ड होना था। लेकिन शासन से उन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिल गया था।
31 मार्च 2016 तक उन्होंने ड्यूटी की थी। इसके पूरे रिकार्ड सरकारी फाइलों में दर्ज हैं। 31 मार्च 2016 के बाद जब वह अपना वेतन और पीएफ लेने के लिए नगर निगम पहुंचे तो उन्हें टरका दिया गया था। परिजनों का कहना है कि निगम ने भुगतान नहीं दिया तो हरद्वारी हाईकोर्ट चले गए।
कोर्ट ने 31 मार्च 2017 तक वेतन भुगतान करने के आदेश दिए थे। लेकिन नगर निगम ने भुगतान नहीं दिया। बाबू शैलेंद्र कौशिक ने उल्टा हरद्वारी के साथ बदसलूकी कर दी। बीते दिन हरद्वारी की हार्ट अटैक से मौत के बाद परिजनों ने निगम अफसरों को कठघरे में खड़ा किया तो बुधवार सुबह ही निगम ने पूरा बकाया पेमेंट कर दिया।
नगर विधायक रितेश गुप्ता चेक लेकर हरद्वारी के घर पहुंचे। चेक मिलने के बाद परिजनों ने दोपहर बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया। मझोला इंस्पेक्टर राजेंद्र नागर ने बताया कि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था, लिहाजा कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई। इस मामले की जांच जीएम जलकल को सौंपी गई है।