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राजकीय शरणालय में युवती की फांसी पर लटकर मौत

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मुरादाबाद के जिला अस्पताल में मृतका नसीमा के बारे जानकारी करते बरेली नारी निकेतन के लोग।
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मुरादाबाद। बरेली से बुधवार को राजकीय महिला शरणालय मुरादाबाद भेजी गई एक युवती बृहस्पतिवार दोपहर शरणालय के ही शौचालय में संदिग्ध हालात में फंदे पर लटकी मिली। उसे फंदे से नीचे उतारकर जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। युवती की मौत की सूचना पर एसपी सिटी, एडीएम सिटी ने मौके पर पहुंचकर करीब तीन घंटे तक छानबीन की तो पता चला कि युवती महिला शरणालय में नहीं रहना चाहती थी। मौके पर सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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एसपी सिटी अंकित मित्तल के मुताबिक, 20 वर्षीय युवती नसीमा के पास एक आईडी प्रूफ था। जिसके मुताबिक उसके पिता की मौत हो चुकी है और उसमें उसका पता राजकीय महिला शरणालय वाराणसी लिखा गया है। पूछताछ करने पर पता चला कि युवती वाराणसी में लावारिस हालत में मिली थी। जिसके बाद उसे नौ साल तक वाराणसी के महिला शरणालय में रखा गया। वहां से वह 20 दिन पहले महिला शरणालय बरेली भेजी गई और बरेली से बुधवार की शाम को उसे मुरादाबाद लाया गया। यहां पर वह आने के बाद खुश नहीं थी। वह रोती रही और गुहार लगाती रही कि उसको यहां पर नहीं रहना है। उसके पास एक डायरी मिली है, जिसमें उसे वाराणसी में रहने की इच्छा जाहिर की है। उसने बरेली महिला शरणालय के वार्डन और डीपीओ (जिला प्रोबेशन अधिकारी) से बात करवाने के लिए कहा लेकिन उसकी बात नहीं करवाई गई। जिसके बाद वह और उदास हो गई। एसपी सिटी के मुताबिक, दोपहर साढे़ 12 बजे वह शौचालय में गई। 20 मिनट बाद दूसरी युवती शौचालय के पास पहुंची और नसीमा को बाहर निकलने के लिए कहा लेकिन उसने अंदर से जवाब नहीं दिया। दरवाजा अंदर से बंद था, दूसरी युवती ने शोर मचाया तो महिला शरणालय में मौजूद अन्य युवतियां वहां पहुंची। धक्का देकर दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर टिन शेड के एंगल पर दुपट्टे से बने फंदे पर नसीमा लटकी थी। शव का पोस्टमार्टम होने के बाद ही युवती की मौत की सही वजह का पता चलेगा। उसके संबंध में वाराणसी और बरेली से भी जानकारी जुटाई जाने का प्रयास किया गया कि उसे मुरादाबाद क्यों भेजा गया, लेकिन अभी जानकारी नहीं मिली है।
वर्जन
युवती कुछ अनमनी लग रही थी और बनारस जाने की बात कह रही थी। काउसलिंग कर अधीक्षिका ने भी कहा था कि भिजवा देंगे। उसे बाद उसने शौचालय में जाकर लोहे के एंगल से फंदा लगा लिया। घटना के वक्त मैं संभल था। डायरी मैंने नहीं पढ़ी है। बनारस भी फोन पर बात की है। उन्होंने बताया कि आपस में लड़ाई-झगड़ा करती थी। इसलिए यहां भेजा गया था। वर्ष 2013 में बनारस पुलिस को शायद भटकती हुई अवस्था में मिली थी। वहां से रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। घटना दुर्भाग्यपूर्ण है- राजेश चंद्र गुप्त, जिला प्रोबेशन अधिकारी।
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