पिछले करीब 3 सालों से खराब दौर से गुजर रही मुरादाबाद की हैंडीक्र्ताफ्ट इंडस्ट्री के लिए पीएम का 20 लाख करोड़ रुपये का भारत आत्मनिर्भर पैकेज ऑक्सीजन का काम करेगा। नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से लड़खड़ाना शुरू हुए मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को जीएसटी भी नहीं भाया था। दो साल से अमेरिका के दबाव में इंडस्ट्री ने ईरान में एक्सपोर्ट की पाबंदियां झेलीं तो रही सही कसर अब कोरोना ने पूरी कर दी थी।
कोरोना संक्र्तमण के दौर में 20 अमेरिकी कंपनियों के दिवालिया हो जाने से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग की कमर ही टूट चुकी थी। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 लाख करोड़ के भारत आत्मनिर्भर पैकेज ने हैंडीक्र्ताफ्ट इंडस्ट्री में नई जान डाल दी है।
मुरादाबाद में हस्तशिल्प की करीब 2500 फैक्ट्रियां हैं। जिनसे दुनिया भर के 130 से ज्यादा देशों को प्रतिवर्ष 10000 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट होता है। नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से एक्सपोर्ट का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा था। देश जीएसटी लागू हुआ तो कर मुक्त रखे गए एक्सपोर्ट पर भी जीएसटी लग गया।
हालांकि निर्यातकों के लिए जीएसटी रिफंड रखा गया था लेकिन 18 फीसदी जीएसटी जमा करने की वजह से निर्यातकों की बड़ी पूंजी कई महीनों के लिए जीएसटी डिपार्टमेंट में ब्लॉक हो गई। कई महीने तक पैसा फंसने की वजह से एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर विपरीत प्रभाव पड़ा और सालाना एक्सपोर्ट 10,000 करोड़ से घटकर 7500 करोड़ रुपये पर आ गया। इसके बाद ईरान को एक्सपोर्ट बन्द हो गया।
तीन सालों से ल?ख?ा रही हैंडीक्र्ताफ्ट इंडस्ट्री कोरोना संक्र्तमण के बाद औंधे मुंह गिर पड़ी। शुरू में कोरोना संक्र्तमण की जद में आए कुछ देशों ने अपने ऑर्डर कैंसिल करने शुरू किए तो पिछले दिनों मुरादाबाद से आयात करने वाली अमेरिका की 20 बड़ी कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। ऐसे में कई निर्यात फैक्ट्रियों में तालाबंदी की स्थिति आ गई थी।
मंगलवार को प्रधानमंत्री के पैकेज से इंडस्ट्री को बड़ी उम्मीदें हैं। इस पैकेज ने हैंडीक्र्ताफ्ट इंडस्ट्री को फिर से ऑक्सीजन दी है। संभल के सींग उद्योग और अमरोहा के ढोलक उद्योग में भी इससे नई जान पड़ेगी। पैकेज को लेकर निर्यातक और व्यवसाई उत्साहित हैं। खासतौर पर इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रमोशनल दरों पर भूमि उपलब्ध कराए जाने के प्रधानमंत्री के ऐलान से व्यवसायियों में उत्साह है।