मुरादाबाद। अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ की मार पीतलनगरी के हस्तशिल्प उद्योग पर नजर आने लगी है। टैरिफ की घोषणा के बाद से पिछले चार महीने में हस्तशिल्प उत्पाद के निर्यात में 500 कंटेनर की कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में नवंबर तक हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात 1000 कंटेनर तक कम हो गया है। यह आंकड़ा लगातार माह दर माह घटता जा रहा है।
अंतरदेशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) से वित्तीय वर्ष 2025-2026 में मार्च से लेकर नवंबर तक 8000 कंटेनर हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात हुआ है, जो कि पिछले वर्ष की इस सीजन की तुलना में 1000 कंटेनर कम है। वित्तीय वर्ष 2024-2025 में मार्च से लेकर नवंबर तक ये निर्यात 9000 कंटेनर था। निर्यात लगातार घटने के कारण आगामी वर्ष में हस्तशिल्प उत्पाद के बाजार को लेकर निर्यातकों में चिंता बढ़ गई है। निर्यातकों को अमेरिकी बाजारों में टिके रहना बड़ी चुनौती बन गया है। शिपमेंट आंकडों के अनुसार हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट पिछले नौ महीने से लगातार कम हो रहा है। पिछले चार महीने में 500 कंटेनर हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात कम हुआ है। द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल का कहना है कि सबसे ज्यादा हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात अमेरिका को होता था। अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद निर्यात ज्यादा घटा है। अगर अमेरिका के टैरिफ को समय रहते कम नहीं किया गया तो पीतलनगरी का एक्सपोर्ट व्यापार पूरी तरह बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
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मुरादाबाद के हस्तशिल्प उत्पाद का 60 प्रतिशत निर्यात अकेले अमेरिका होता है
-जिला उद्योग केंद्र के अनुसार मुरादाबाद से हर साल लगभग 10437 करोड़ रुपये का हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात होता है। इसमें 60 प्रतिशत अकेले अमेरिका निर्यात होता है। निर्यातकों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 में मुरादाबाद से अमेरिका के लिए निर्यात निराशाजनक रहा है। अमेरिका से बड़े आर्डर नहीं मिल रहे हैं। मुरादाबाद से हस्तशिल्प उत्पाद का निर्यात अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, यूएसए, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, जापान आदि देशों में भी किया जाता है।
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टैरिफ से डेढ़ से दोगुना बढ़ी हस्तशिल्प उत्पाद की कीमत
- एमएचईए के प्रेसीडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद मुरादाबाद से अमेरिका जाने वाले हस्तशिल्प उत्पाद की कीमत डेढ़ से दो गुना बढ़ गई है। सितंबर से पहले के जिले के तमाम निर्यातकों के आर्डर कैंसिल हो गए हैं। 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद तो तैयार आर्डर को होल्ड कर दिया गया। अब आर्डर ही न के बराबर मिल रहे हैं।
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करीब 400 लोग हर साल करते हैं निर्यात
-जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार ने बताया कि जिले के नौ हजार लोगों के पास वैलिड निर्यात और आयात कोड है। इसमें से दो हजार लोग ऐसे हैं जो निर्यात और आयात दोनों करते हैं। इसमें 350 से लेकर 400 निर्यातक ऐसे हैं जो हर साल निर्यात करते हैं। आईआईए हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी के चेयरमैन सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि टैरिफ की वजह से छोटे निर्यातक खत्म हो रहे हैं। निर्यातकों को अब दूसरे देशों में नए बाजार की तलाश है।