मुरादाबाद। लाकड़ी फाजलपुर स्थित डायनेमिक डेकोर फैक्टरी के गार्ड उमेश चौहान (55) को खुद की बंदूक से गोली लग गई। उसकी मौके पर मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि बंदूक साफ करते समय गार्ड को गोली लगी थी। सीओ ने मौके का मुआयना किया। इस मामले में परिजनों ने फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश जताया। सवाल उठाया कि घटना के बाद घायल गार्ड को किन कारणों के चलते अस्पताल नहीं पहुंचाया गया।
प्रकाश नगर एकता कॉलोनी आजादनगर निवासी उमेश चौहान लाकड़ी स्थित डायनेमिक डेकोर फैक्टरी में गार्ड की नौकरी करते थे। बीमार होने के कारण गार्ड एक मई और पांच मई को फैक्टरी ड्यूटी करने के लिए गया था। अवकाश पर होने के कारण प्रबंधन ने उमेश के स्थान पर दूसरा गार्ड रख लिया था। शुक्रवार की सुबह गार्ड अपनी लाइसेंसी 12 बोर की एकनाली बंदूक लेने के लिए फैक्टरी में गया। गार्ड रूम में बंदूक से अचानक गार्ड के सीने में गोली लग गई। लहूलुहान होकर वह नीचे गिर पड़ा। गोली की आवाज सुनकर फैक्टरी के कर्मचारी और गार्ड भयभीत हो गए। इस मामले में अन्य गार्ड सुशील कुमार ने घटना की जानकारी अपने अधिकारी संजेश मिश्रा को दी।
इसके बाद मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रबोध कुमार ने घटना से पुलिस और फैक्टरी मालिक प्रतीक मुंजयाल को दी। सीओ अर्पित कपूर ने मौके का मुआयना कर एफएसएल टीम को बुलाया। टीम ने मौके से फिंगर और फुट प्रिंट उठाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस बारे में थाना प्रभारी का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में गार्ड के पुत्र अमित ने फैक्टरी प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। फैक्टरी के मालिक प्रतीक मुंजयाल का कहना था कि वह घटना की सूचना मिलने के बाद आए थे।
बेटे और बहू फैक्टरी मालिक पर बिफरे
पुलिस के सूचना देने पर गार्ड का बेटा अमित चौहान अपनी पत्नी प्रियंका के साथ दोपहर एक बजे पहुंचा। रोते हुए बेटे ने बताया उसे पुलिस ने एक्सीडेंट होने की सूचना 12 बजे दी थी। पूछने पर पता चला कि उसके पिता की मौत साढ़े दस बजे के करीब हुई है। आरोप लगाया कि गोली लगने के बाद प्रबंधन ने उसके घायल पिता को घंटों बाद भी अस्पताल नहीं पहुंचाया। यदि फैक्टरी मालिक पिता को अस्पताल भेजवाते तो उसके पिता बच सकते थे। गार्ड के दो बेटे अमित और सिद्धांत चौहान है। परिजनों ने बताया कि गार्ड उमेश चौहान मूल रूप से एटा के निवासी थे, तीन दशकों से यहां रहते थे। पुलिस तहरीर देने के बाद कोई सुनवाई नहीं कर रही है।