होटल हॉली डे रेजीडेंसी में लघु उद्योग भारती की जीएसटी पर आयोजित सेमिनार में उपस्थित अतिथि
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प्रदेश सरकार ने कारोबार से जुड़े विभागों को वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) का प्रारूप भेजा है, जिस पर मंथन कर राय मांगी है। कुछ विभागों ने अपने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए हैं।
विभागों में जीएसटी के प्रारूप पर अधिकारी फिलहाल ‘टैक्ट’ मानकर चर्चा कर रहे हैं। हर पहलू पर मंथन किया जा रहा है। लेकिन एक्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जीएसटी से करों का बिखराव समाप्त होगा और कारोबारियों से इससे राहत मिलेगी।
‘कंज्यूमर बेस्ड टैक्स’ होने के कारण एक ही स्थान पर टैक्स जमा होगा। करों से जुडे़ विभागों और कारोबारियों में इस समय सबसे अधिक चर्चा जीएसटी को लेकर है। वाणिज्य कर, एक्साइज, मनोरंजन, सर्विस टैक्स, एडीशनल एक्साइज में जीएसटी ही चर्चा का विषय है।
चूंकि अभी एक्ट अभी तैयार नहीं हुआ है इसलिए प्रारूप में कोई भी परिवर्तन संभव है। अधिकारी मान रहे हैं कि एक्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।