मुरादाबाद। यूपी में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) का कुनबा जुगाड़ से बढ़ाया जाएगा। एक अप्रैल 1937 को गठन के बाद से जीआरपी में पदों की संख्या अधिक नहीं बढ़ाई गई है। जबकि साल दर साल ट्रेनों की संख्या और उनमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब जीआरपी के हर थाने को हर वर्ष सिविल पुलिस से करीब 20 सिपाही और दरोगा मिलेंगे।
जीआरपी के थानों और चौकियों में इनका कार्यकाल सिर्फ एक वर्ष का होगा। इस दौरान वेतन और अन्य सुविधाएं सिविल पुलिस से ही मिलेंगी। मूल तैनाती भी सिविल पुलिस के किसी थाने में ही होगी लेकिन काम जीआरपी के लिए करेंगे। इनके अलावा प्रदेश में पहले से स्वीकृत करीब 5200 पदों पर व्यवस्था यथावत रहेगी। इन पदों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती तीन वर्ष के लिए ही होगी।
उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएं भी जीआरपी से मिलती रहेंगी। पिछले वर्ष मुरादाबाद दौरे पर आए एडीजी रेलवे प्रकाश डी. ने जीआरपी की स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए सिविल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन की जानकारी साझा की थी। अब मंथन का निष्कर्ष यह निकला है कि प्रदेश में जीआरपी के सभी थानों में अतिरिक्त सिपाही और दरोगा सिविल पुलिस से भेजे जाएंगे।
राजकीय रेलवे पुलिस को पूरे प्रदेश में दो जोन और छह अनुभागों में बांटा गया है। इसमें लखनऊ और इलाहाबाद जोन शामिल हैं। लखनऊ जोन में लखनऊ, मुरादाबाद और गोरखपुर अनुभाग आते हैं। जबकि इलाहाबाद जोन में इलाहाबाद, आगरा और झांसी अनुभाग आते हैं। इस तरह पूरे प्रदेश में जीआरपी के कुल 665 थाने और 43 रिपोर्टिंग चौकियां हैं।
सबसे अधिक 14 थाने मुरादाबाद जोन में हैं। इसके बाद लखनऊ में 13, आगरा में 12, गोरखपुर में 11, झांसी में आठ और इलाहाबाद अनुभाग में सात थाने हैं। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 150 ट्रेनें गुजरती हैं। जीआरपी का कुनबा बढ़ने के बाद हर ट्रेन में एस्कॉर्ट की तैनाती हो सकेगी।
वर्तमान में प्रदेशभर में स्वीकृत बल की पदवार स्थिति
• इंस्पेक्टर : 75
• सब-इंस्पेक्टर : 366
• हेड कांस्टेबल : 581
• कांस्टेबल : 4,029
• चालक एवं सहायक स्टाफ : 88
(स्रोतः यूपी जीआरपी की आधिकारिक वेबसाइट)
वर्जन
जीआरपी की स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए हर जिले से करीब 20 सिपाही और दरोगा हमें मिल रहे हैं। यह जीआरपी के लिए कार्य करेंगे लेकिन वेतन सिविल पुलिस जारी करेगी। नगीना, बदायूं आदि थानों पर सिविल पुलिस से कर्मचारी आ गए हैं। जल्द ही सभी थानों में आएंगे। इससे हम स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर सुरक्षा व सेवाएं दे पाएंगे।
- आशुतोष शुक्ला, एसपी जीआरपी