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दादी मेरा अलार्म और मम्मी रातों की साथी : पावनी

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पावनी सिंघल ।
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मुरादाबाद। देहरादून रीजन में चौथा, प्रदेश में तीसरा और जनपद में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली सेंट मेरी सीनियर सेकेंड्री स्कूल की छात्रा पावनी सिंह का कहना है कि मेरी दादी कामिनी अग्रवाल मेरी अलार्म और मां रुचि सिंघल मेरी रातों की साथी हैं। इनके बिना मैं अपनी सफलता के बारे में सोच भी नहीं सकती। मैंने दादी को जितने बजे भी जगाने के लिए कहा, तो घड़ी अलार्म बजाना भूल सकती है, लेकिन मेरी दादी ने मुझे जगाया। मैं पढ़ती हूं तो मम्मी साथ जगती हैं, ताकि मुझे अकेलापन न महसूस हो या नींद न आए। शुरू से ही मेरे सौ में से सौ अंक आए हैं, इसलिए पांच अंक कटने का अफसोस हो रहा है।
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पावनी का कहना है कि दादी मेरे लिए प्रतिदिन पाठ करती हैं। स्कूल जाते समय कुमकुम का टीका लगाना कभी नहीं भूलतीं। उनका आशीर्वाद ही आज सफलता का आधार बना है। दादी एमए तक पढ़ी हुई हैं, इसलिए मुझे हिंदी वही पढ़ाती हैं। कुल 495 अंकों में हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान में सौ में सौ, गणित में 98, सोशल साइंस में 97 अंक मिले हैं। पावनी को पेंटिंग करने और कैलीग्राफी राइटिंग का शौक है। शब्दों को बनाकर लिखने से लिखावट सधी हुई और खूबसूरत लगती है। प्रतिवर्ष ओलंपियाड की परीक्षा देती हूं। एक बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पांचवीं रैंक मिल चुकी है। पापा गौरव सिंघल का बिजनेस है, जबकि मम्मी रुचि घर संभालती हैं। मम्मी और बड़े भैया सिद्धार्थ डॉक्टर बनना चाहते थे। भैया की तबीयत खराब होने की वजह से उनकी मेडिकल की पढ़ाई छुड़वानी पड़ी। मम्मी और भैया के इस अधूरे सपने को मैं पूरा करूंगी। मम्मी-दादी के अलावा कभी मुझे बाहर के दोस्त की जरूरत महसूस नहीं हुई। मोबाइल फोन और टीवी भी नहीं देखती हूं। जब भी मन परेशान होता है तो धीमी आवाज में संगीत सुनती हूं। आइसक्रीम मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है। इसे खाते ही मन खुश हो जाता है और मम्मी की सभी बात मान लेती हूं।
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