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जौहर यूनिवर्सिटी: विश्वविद्यालय को अधिग्रहित कर सकती है सरकार, जिलाधिकारी ने भेजा प्रस्ताव

Sun, 08 Mar 2020 03:35 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
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जौहर यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
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मोहम्मद अली जौहर अली ट्रस्ट की ओर से संचालित जौहर यूनिवर्सिटी को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव जिलाधिकारी ने दोबारा शासन को भेजा है। उन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा है कि जौहर यूनिवर्सिटी की 78 हेक्टेयर में से 36 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। 

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इसी तरह से यूनिवर्सिटी में लगभग 163 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है, इसमें से 88 करोड़ की रुपये की राशि शासकीय स्रोतों से प्राप्त है। इसको देखते हुए यूनिवर्सिटी का संचालन सरकार अपने हाथ में ले ले।

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव एक बार जुलाई 2019 में भेजा गया था और फिर से फरवरी 2020 में भेजा गया है। इस मुद्दे पर सरकार को ही अंतिम फैसला करना है। उन्होंने बताया कि एक शिकायत की जांच सीडीओ की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय समिति से कराई गई थी। 
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समिति की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है जिसके आधार पर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। उन्होंने बताया कि एसडीएम सदर की भी एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया कि जौहर ट्रस्ट को जिन शर्तों के तहत छूट दी गई थी उनका पालन नहीं किया जा रहा है। 

चैरिटी के रूप में जो शिक्षा की व्यवस्था दी जानी चाहिए थी उसमें भी समस्या है, फीस सस्ती नहीं है। शिक्षा को लेकर और उसकी गुणवत्ता को लेकर उस रिपोर्ट में इन चीजों का उल्लेख करते हुए यहां से एक प्रस्ताव भेजा गया है।
 

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जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष-सचिव ने नहीं दिया जवाब, दर्ज होगा वाद

मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में कार्य करने और इस बारे में वार्षिक रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराने के आरोप में इसके अध्यक्ष मोहम्मद आजम खां और सचिव डॉ. तजीन फात्मा को एसडीएम सदर ने नोटिस भेजा था। 

निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी इसका जवाब नहीं दिया गया है। इसके बाद एसडीएम सदर ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी है। इस मामले में अब वाद दर्ज करने की का्र्रवाई हो सकती है।

जिलाधिकारी आनन्जेय कुमार सिंह ने बताया कि जौहर ट्रस्ट को कई शर्तों के अधीन 12.5 हेक्टेयर से अधिक जमीन खरीदने और स्टांप ड्यूटी में छूट दी गई थी। इन शर्तों का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा पिछले 15 सालों से ट्रस्ट की वार्षिक गतिविधियों की जानकारी जिलाधिकारी को नहीं दी गई है, जबकि ऐसा करना अनिवार्य है। 

उन्होंने बताया कि जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष और सचिव ने एसडीए सदर के नोटिस का जवाब नहीं दिया है। अब इस मामले में नियमानुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।
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