निर्यातकों को मिलने वाली रियायतों में एक के बाद हो रही कटौती से निर्यातकों में नाराजगी है। बाजार में मंदी के बीच रियायतों में कटौती से निर्यातकों में घबराहट भी है। अब इस मुद्दे को लेकर निर्यातकों की एसोसिएशन राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगा रहे हैं।
निर्यात इंडस्ट्री सरकार को विदेशी मुद्रा दिलाने का बड़ा स्रोत है। जिसके चलते सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक रियायतें देती है। पिछले कुछ समय से सरकार ने निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों में कटौती करना शुरू कर दिया है। इसमें फोकस लाइसेंस, ड्रा बैक, स्पेशल लाइसेंस स्कीम आदि शामिल हैं।
इन रियायतों में कटौती के कारण निर्यातकों को होने वाले मुनाफे में भी कमी आई है। इस समय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में मुकाबला भी बढ़ा है। चीन ने हैंडीक्राफ्ट में मशीनरी के प्रयोग से ट्रेंड ही बदल दिया।
नजीता ये रहा कि भारत में विशेषकर मुरादाबाद में मशीनों का प्रचलन बढ़ा और यहां से बाहर जाने वाले प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़ी, लेकिन विशुद्ध हैंडीक्राफ्ट का काम कम हो गया।
ऐेसे में सरकार ने रियायतों में कटौती शुरू कर दी। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व सचिव सतपाल ने बताया कि इस समय निर्यातकों को मिलने वाली रियायतों में अधिकांश नाममात्र के लिए रह गई हैं। एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्रालय से इन रियायतों को फिर से शुरू करने की मांग की है।
कटने वाली रियायतें
एमडीए ग्रांट: जो निर्यातक विदेशों में लगने वाले प्रमोशन फेयर में ईपीसीएच की ओर से शामिल होते हैं। उन्हें एमडीए ग्रांट दी जाती है। लेकिन जो निर्यातक काउंसिल के अलग फेयर में शामिल होते हैं उन्हें भी एमडीए ग्रांट देने दिए जाने की मांग की गई है।
सेक्शन 428 की बहाली: निर्यातकों के प्रोडक्ट जब हैंडीक्राफ्ट की किसी भी कैटेगरी में नहीं आते तो उसे आयात निर्यात पालिसी के सेक्शन 428 में डाल दिया जाता है। जिसके आधार पर निर्यातकों को फोकस लाइसेंस मिल जाता था। लेकिन अब पालिसी से यह क्लाज हटा दिया गया। अब इसे दोबारा शुरू करने की मांग की जा रही है।
ईपीजीसी इंपोर्ट लाइसेंस: हैंडीक्राफ्ट उद्योग को ईपीजीसी लाइसेंस आसानी से मिल जाता है। लेकिन इसमें शर्त है कि 50 प्रतिशत प्रोडक्ट इंपोर्ट किए गए प्रोडक्ट के बदले में एक्सपोर्ट करने पड़ते हैं।
इसे एक्सपोर्ट कर पाना मुश्किल होता है। निर्यातकों की मांग है कि ब्लाक वाइज एक्सपोर्ट का क्लाज हटाया जाए।
स्पेशल लाइसेंस : निर्यातकों को दस प्रतिशत का स्पेशल लाइसेंस मिलता था। जिसे सरकार ने वापस ले लिया है। निर्यातकों को स्पेशल लाइसेंस फिर से दिया जाए।
स्क्रिप्ट लाइसेंस: स्क्रिप्ट लाइसेंस के तहत निर्यातकों को टोटल टर्नओवर पर एक प्रतिशत की छूट मिलती थी। इसे भी अब खत्म कर दिया गया है।