बौद्ध विहार में अपने रिश्तेदार के घर सहमी सी बैठी इस छात्रा के चेहरे पर तैर रही दहशत यह बताने के लिए काफी है कि मनचलों का दुस्साहस किस कदर बढ़ गया था। छात्रा तीन महीने से खौफ में थी और पुलिस से भी उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी।
योगी सरकार में उसकी िशकायत पर रिपोर्ट तोदर्ज कर ली गई मगर खुलेआम घूम रहे शोहदों से वह िछपती बचती घूम रही है। उसकी सीएम से गुहार है िक वे छात्राओं की सुरक्षा के िलए और कड़े कदम उठाएं और शोहदों को िगरफ्तार कराएं।
आगरा की रहने वाली ये छात्रा नवंबर में मुरादाबाद आई थी। राजकीय पालीटेक्निक में दाखिला लेने के बाद छात्रा ने हरथला में प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टल में रहना शुरू किया। अभी दो माह ही बीते थे कि शोहदों ने उस पर कमेंट्स करने शुरू कर दिए। पड़ोस में रहने वाले अमित और विशाल चौधरी ने आते - जाते उसका पीछा करना शुरू कर दिया।
आपबीती सुनाते वक्त छात्रा फफक पड़ती है। कहती है कि वह जब भी कालेज जाती थी तो मनचले बाइक से उसका पीछा करते थे। शुरू में उसने अनदेखा किया लेकिन जब मनचलों ने कमेंट्स शुरू किए तो उसने विरोध किया। लेकिन घर से मीलों दूर यहां अकेले रह रही छात्रा उस वक्त सहम गई जब मनचलों ने उसे सरेआम उसे उठा ले जाने की धमकी देनी शुरू कर दी।
इसके बाद छात्रा ने अकेले निकलना बंद कर दिया और वह साथी छात्राओं का सहारा लेने लगी। एक दिन मनचलों ने उसे सड़क पर रोक लिया और दोस्ती करने को कहा। छात्रा ने इंकार किया तो उसे धमकी दी कि उठा ले जाएंगे। सहमी छात्रा ने हॉस्टल पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत की।
हॉस्टल में रहने वाली एक महिला के साथ आरोपियों के घर जाकर भी कहा लेकिन किसी ने मदद नहीं की। शिकायत के बाद तो आरोपी आपे से बाहर हो गए और छात्रा को हॉस्टल में घुसकर अगवा कर लेने की धमकी देने लगे। तीन महीने तक छात्रा ने खुद को हॉस्टल में कैद कर लिया।
वह आगरा अपने घर लौटी तो भी मनचले फोन करके परेशान करते रहे। छात्रा की मां ने मुरादाबाद में रहने वाले अपने रिश्ते के भाईयों को इसकी जानकारी दी। भाई ने छात्रा को वापस मुरादाबाद बुलाया और पुलिस से शिकायत की। लेकिन सिविल लाइंस पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
छात्रा ने डीआईजी को कॉल करके आपबीती सुनाई जिसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट लिखी। आरोपी छात्रा को धमकी दे रहे हैं कि केस वापस ले लो, वरना इसका अंजाम बुरा होगा। खौफजदा छात्रा ने शोहदों के डर से पहले हॉस्टल और अब शहर छोड़ दिया है। वह आज चुपचाप आगर लौट गई।