कॉसमॉस अस्पताल की तीसरी मंजिल पर भर्ती घायल छात्राएं हल्की सी भी आहट पर भी बिलख पड़ती हैं। इनकी आंखों से आसूं बहने लगते हैं और कुछ बोलने से पहले ही रोने लगतीं हैं। इन बच्चियों की जान तो बच गई है। लेकिन दहशत इनके चेहरों पर अब भी बरकरार है।
कई छात्राओं के परिवार वालों की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। इलाज कराने को इनके पास पैसा नहीं और स्कूल की ओर से हाथ खड़े कर दिए गए हैं। उन्होंने कह दिया है कि अब आगे इलाज का खर्च खुद ही उठाना पड़ेगा। डिस्चार्ज के बाद हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।
अस्पताल से डिस्चार्ज के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जबकि बच्चियों की हालत घर ले जाने लायक नहीं है। क्रिकेटर रितु पाल की मां ने बताया कि बेटी लंबे समय से टीम में चयन के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही थी। अब वह बाहर जाने वाली थी। लेकिन हादसे ने बेटी और परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया है।
बेटी बेड पर पड़ी इन बातों को याद कर सुबक रही है। छात्रा पल्लवी की मां शीला ने बताया कि मैं तो बेहद गरीब हूं। घर में कोई कमाना वाला भी नहीं है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। बेटी के इलाज को पैसे कहां से लेकर आऊ। अब अस्पताल वालों ने भी कह दिया है कि हमारे पास अब तक का आदेश था।
अगर आगे इलाज कराना है तो रकम जमा करनी होगी। खुशी, आशा और पिंकी की हालत में भी अभी कोई सुधार नहीं हो पाया है। इनका आरोप है कि घायलों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उधर जिला अस्पताल से शुक्रवार को रति पुत्री सुभाष कश्यप, साहिबा, आंचल और संस्कृति को डिस्चार्ज कर दिया है।