मुरादाबाद। आरबीआई की ओर बुधवार को डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी में आर्थिक अपराध से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आरबीआई के अधिकारियों ने पुलिस कर्मियों को साइबर और आर्थिक अपराध के मामलों की विवेचना और नकली नोटों की पहचान करने के तौर तरीके बताए। कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों से 136 पुलिसकर्मी शामिल हुए। यह सभी पुलिसकर्मी आर्थिक मामलों की विवेचना कर रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के एजीएम जितेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि बढ़ते आर्थिक और साइबर अपराध के दौर में जितना लोगों का जागरूक होना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार और जानकार जांच अधिकारी का होना है।
उन्होंने ने बताया कि आर्थिक अपराध के मामलों में मजबूत साक्ष्य जुटाना जरूरी होता है। साइबर अपराध के मामले में बहुत लंबी कड़ियां जुड़ी होती हैं। इनको समझना जरूरी होता है। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने भी बैंक अफसरों से सामने अपने सवाल रखे। उन्होंने बताया कि वह जब आर्थिक मामलों की जांच करते हुए बैंक तक पहुंचते हैं तो बैंक अधिकारी सहयोग नहीं करते हैं। इसके जवाब में एजीएम ने बताया कि वित्तीय अपराध के मामलों में बैंक की पूरी जिम्मेदारी हैं कि वह विवेचक की मदद करें। अगर कोई बैंक अधिकारी मदद नहीं करता तो उसकी शिकायत भी की सकती है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से ऐसे मामलों की अपने स्तर से जांच कराई जाती है। उन्होंने बताया कि बाजार में नकली नोट भी घूम रहे हैं। कई जगह पुलिसकर्मियों ने नकली नोट भी बरामद किए हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को नकली नोटों की पहचान करने के तौर तरीके भी बताए। आरबीआई की एडवाइजर निरंजना पाटिल ने कार्यशाला में मौजूद पुलिसकर्मियों को बताया कि गैर बैंकिंग कंपनियां लालच व स्कीम के नाम पर जगह-जगह भोले भाले लोगों से रकम जमा करा लेतीं हैं। ऐसे ठगों से लोगों को तो जागरूक करना है, साथ ही इन ठगों पर भी कार्रवाई करें। कार्यशाला में डीआईजी अकादमी विकास कुमार वैद्य, एएसपी महेंद्र कुमार समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।