बाइक लूट के शक में उठाए गए अगवानपुर के एक फर्नीचर कारोबारी को पुलिस ने इस कदर पीटा कि उसका जबड़ा तोड़ डाला। पुलिस ने उसे अवैध हिरासत में रखा और निर्वस्त्र करके लाठी डंडों व पट्टे से पिटाई की। फर्नीचर कारोबारी का आरोप है कि पुलिस ने उसे निर्वस्त्र करने के बाद करेंट लगाया, उसके गुप्तांगों पर भी चोट पहुंचाई गई।
हालांकि तबियत बिगड़ने पर पुलिस ने फर्नीचर कारोबारी को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया। पीड़ित ने पुलिस अफसरों से मामले की शिकायत की है जिसके बाद प्रकरण पर जांच बैठा दी गई है। अगवानपुर में मोहल्ला सैफियान निवासी शाहे आलम (30) पुत्र रईस अहमद को पुलिस ने शनिवार को शाम करीब पांच बजे कस्बे से ही उठाया था।
पुलिस ने शाहे आलम के दो अन्य साथियों मोहम्मद रजी और नासिर को भी पकड़ा था। शाहे आलम फर्नीचर कारोबारी है, उसका आरोप है कि अगवानपुर चौकी इंचार्ज धीरज सोेलंकी और सिपाही अरुण व दो अन्य तीनों को पहले अगवानपुर पुलिस चौकी ले गए फिर सिविल लाइन थाने ले आए।
शाहे आलम का आरोप है कि पुलिस ने बाकी लोगों को तो छोड़ दिया लेकिन एसआई धीरज सोलंकी ने उसे सिविल लाइन थाने में कई घंटे तक यातनाएं दीं। उसे निर्वस्त्र कर दिया, लाठी डंडों से पीटा और करेंट लगाया। पुलिस पिटाई में शाहे आलम का जबड़ा तक टूट गया।
जब रात में करीब साढ़े बारह बजे पुलिस की बेरहम मार से शाहे आलम की तबियत बिगड़ गई तो उसे आनन फानन छोड़कर उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। शाहे आलम को पुलिस ने आठ अक्तूबर को अगवानपुर बाईपास पर हुई एक बाइक लूट के सिलसिले में उठाया था। पुलिस का कहना है कि वादी ने शाहे आलम का नाम लिया था।
सोमवार को पीड़ित अपने परिजनों के साथ एसपी सिटी आफिस पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। एसपी सिटी डा. राम सुरेश यादव का कहना है कि पुलिस ने बाइक लूट के शक में शाहे आलम को उठाया था। थाने में थर्ड डिग्री देने की बात सामने आई है। पुलिस पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं लिहाजा मामले की जांच सीओ सिविल लाइंस को दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।