मुरादाबाद। कुछ साल के अंतराल में ही कॉलेजों की शृंखला खड़ी करने वाला आरोपी प्रबंधक डॉ. बलराम सिंह रसूलदार है। पुलिस कस्टडी में आने के बाद भी उसका जलवा बरकरार रहा। आरोपी को एसी कक्ष में तो बैठाया ही साथ ही उसे बचाने के लिए भी कई बार स्क्रिप्ट बदली गई। शिक्षा विभाग की ओर से थाने में दी गई तहरीर में उसका नाम शामिल था, लेकिन बार-बार फोन घनघनाने के बाद स्क्रिप्ट बदल दी गई। सूत्रों का दावा है कि दूसरी तहरीर लिखी गई। जिसमें आरोपी प्रबंधक का नाम गायब कर दिया गया। इसी बीच लखनऊ से आए आदेश पर तीसरी तहरीर लिखी गई। जिसमें प्रबंधक को पद नाम से आरोपी बनाया गया है।
ठाकुरद्वारा के कुंआखेड़ा निवासी डॉ. बलराम सिंह और उससे जुड़े लोगों के पांच कॉलेज हैं। ये सभी कॉलेज और स्कूल पिछली पच्चीस साल में ही तैयार किए गए हैं। बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे डीएम को एक अनजान कॉल से सूचना मिली थी कि कुंआखेड़ा के भगवंत सिंह डिग्री कॉलेज में दसवीं की कॉपियां लिखी जा रही हैं।
डीएम के आदेश पर शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग की टीमें ने छापा मारकर सॉल्वरों को मौके से पकड़ लिया था। पुलिस सभी को पकड़कर थाने ले गई थी। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया था कि भगवंत सिंह डिग्री कॉलेज के प्रबंधक डॉ. बलराम सिंह के बीएस इंटर कॉलेज से ही कॉपियां और प्रश्नपत्र निकाले गए थे। पुलिस मौके से 26 आरोपियों को पकड़ कर थाने ले गई थी। कुछ देर बाद ही आरोपी प्रबंधक बलराम सिंह को पकड़ लिया था।
डॉ. बलराम सिंह ब्लाक प्रमुख भी रह चुका है। जिस कारण उसकी राजनीतिक से जुड़े लोगों से भी अच्छे संबंध हैं और शिक्षा विभाग के अफसरों से भी अच्छी पकड़ है। यही वजह है कि थाने में जाने के बाद भी उसे एसी कक्ष में बैठाया गया। साढ़े नौ बजे तक पुलिस कार्रवाई कर चुकी थी। बावजूद इसके पुलिस ने थाने में जो केेस दर्ज किया है। उसमें तहरीर देने का समय 11 बजकर 10 मिनट दर्शाया गया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि पहली तहरीर में आरोपी प्रबंधक को नाम के साथ आरोपी बनाया गया था, लेकिन कुछ देर बाद ही तहरीर बदल दी गई। इस तहरीर में आरोपी प्रबंधक का नाम गायब कर दिया गया था। अफसरों ने इसकी जानकारी लखनऊ में दी। एक एक शब्द पढ़कर सुनाया गया। देर इंतजार करने के आदेश मिले। लखनऊ से आदेश मिलने के बाद तहरीर फिर बदली गई। इस बार प्रबंधक को पद नाम से आरोपी बनाया गया। केस दर्ज होने के बाद उसकी प्रबंधक की गिरफ्तारी भी दिखा दी गई।