सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के नाम पर चार सौ उद्योगों को दिए गए 25 करोड़ रुपये डूबने की कगार पर हैं। ऋण लेने वाले उद्योग संचालकों को बैंकों ने आखिरी चेतावनी दी है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि संचालकों ने यदि मार्च तक ऋण नहीं चुकाया तो उनके खातों को एनपीए घोषित कर दिया जाएगा।
मुरादाबाद जिले के विभिन्न बैंकों से करीब चार सौ व्यक्तियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग लगाने के नाम पर ऋण लिया था, लेकिन किश्त जमा नहीं होने की वजह से अब यह ऋण एनपीए होने की कगार पर पहुंच गया है। अग्रणी जिला प्रबंधक सतीश कुमार गुप्ता का कहना है कि चार सौ उद्योगों के करीब 25 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।
यदि 31 मार्च तक उद्योग संचालक रकम जमा नहीं करते हैं तो खाता एनपीए होने के कारण ब्याज दर पर दो फीसदी की पेनल्टी लगने लगेगी। उन्होंने बताया कि 45340 खातों का 754.84 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए हो चुका है। इसमें से दिसंबर माह में लोक अदालत के माध्यम से 1045 खातों का 14.75 करोड़ रुपये का समझौता कराया गया है।
फिलहाल 740 करोड़ 9 लाख रुपये एनपीए में है। अब 25 करोड़ ऐसी है जो डूबने की कगार पर है। इस संबंधी किश्तें जमा न होने से बैंक प्रबंधन चिंतित है। इस रकम को एनपीए करने के लिए अंतिम चेतावनी जारी की गई है। यदि यह रकम भी नहीं लौटी तो एनपीए का बोझ 765 करोड़ नौ लाख रुपये हो जाएगा।