मुरादाबाद। कटघर क्षेत्र में रहने वाली एक एचआईवी ग्रसित महिला का शहर के एक नर्सिंग होम संचालक ने गुपचुप ढंग से प्रसव कर दिया और उसे उसे घर भेज दिया। इतना ही नहीं, जांच में एचआईवी पॉजिटिव की स्पष्ट रिपोर्ट के बाद पर्चे पर महिला को काला पीलिया से पीड़ित दर्शा दिया। प्रसव के बाद नवजात को इस संक्रमण से बचाने के लिए जो दवा दी जाती है वह भी नहीं दी और न ही इसकी इत्तला जिला अस्पताल अथवा स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों को दी। पूरे मामले में जिला अस्पताल की काउंसलर ने आपत्ति दर्ज कराई है।
17 दिसंबर को कटघर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली एक गर्भवती महिला अपनी जांच कराने जिला अस्पताल पहुंची थीं। यहां रक्त परीक्षण की रिपोर्ट में एचआईवी पॉजिटिव निकला था। प्रसव की अनुमानित तिथि भी दिसंबर के अंतिम सप्ताह की थी। इस पर जिला महिला अस्पताल की एचआईवी काउंसलर मीनाक्षी शर्मा व ममता एनजीओ की कार्यकर्ता यासमीन ने महिला की काउंसलिंग की। उसका कार्ड बनवाया और उसे सलाह दी कि जब प्रसव पीड़ा हो तो वह सीधे जिला अस्पताल आ जाए। जिससे उसके सुरक्षित प्रसव की प्रक्रिया वह लोग अपनी देखरेख अथवा निगरानी में करवा सकें। 30 दिसंबर तक भी महिला जब जिला अस्पताल नहीं पहुंची तो जिला अस्पताल में एचआईवी की काउंसलर व एनजीओ कार्यकर्ता उसकी चिंता हुई। अस्पताल में उसका रिकार्ड खंगाल कर फोन से पता किया तो पता चला संबंधित महिला शहर के एक नर्सिंग होम में प्रसव करा चुकी है। एचआईवी काउंसलर की पूछताछ में महिला ने बताया कि प्रसव के लिए निजी अस्पताल के चिकित्सक ने उससे 25 हजार रुपये लिए। अस्पताल के पर्चे देखे तो वह दंग रह गईं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर एचआईवी पॉजिटिव आने के बावजूद चिकित्सक ने अपने पर्चे में महिला के काला पीलिया से ग्रसित होना दर्शाया था। जबकि जिला अस्पताल में कराई गई जांच रिपोर्ट में महिला काला पीलिया से ग्रसित नहीं पाई गई थी। मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने संबंधित चिकित्सक से पूछताछ की तो अपने को फंसता देख चिकित्सक ने महिला के घर अपने लोगों को भेज कर उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर व अंगूठा लगवा लिया।
काउंसलर ने बताया कि निजी अस्पताल प्रशासन एचआईवी ग्रसित महिला का प्रसव करा सकते हैं लेकिन उन्हें इसकी सूचना फोन से उन्हें देनी चाहिए थी। इसके निर्देश निजी अस्पतालों को पहले ही दिए जा चुके हैं। इसका एक कारण यह भी है कि जिला अस्पताल की टीम अस्पताल पहुंच कर नवजात शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए नेवरपिन सीरप पिला सके। यह सीरप सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि गुरुवार को वह फिर जांच पड़ताल के लिए इस नर्सिंग होम गईं थीं। जहां अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया कि उन्हें इसकी जानकारी थी कि महिला एचआईवी से पीड़ित है। उन्होंने समय से सूचना न देने पर अपनी गलती स्वीकार की है। उधर अस्पताल संचालक का कहना है कोई अनियमितता नहीं की गई है। महिला ने खुद के एचआईवी पीड़ित होने की बात किसी को न बताने को कहा था, इसलिए उसके पर्चे पर महिला को काला पीलिया से पीड़ित होना दर्शा दिया गया।
उच्चाधिकारियों को भेज दी है सूचना
निजी अस्पताल प्रशासन ने एचआईवी पीड़ित महिला का प्रसव करने के तुरंत बाद इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को न देकर अनियमितता बरती है। इससे बच्चे को नेवरपिन सीरप देर से पिलाई जा सकी है। पूछताछ में भी अस्पताल प्रशासन पहले सबकुछ छिपाता रहा। पूरी स्थिति से निदेशक एचआईवी को फोन से अवगत करा दिया है। आगे जैसा उच्चाधिकारियों का आदेश प्राप्त होगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मीनाक्षी शर्मा, एचआईवी काउंसलर, जिला अस्पताल