एनआईए और एटीएस की टीम ने संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकियों से वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी चौकी में करीब चार घंटे पूछताछ की गई। अफसरों ने संदिग्धों से बरामद अवैध हथियार व अन्य समान के बारे गहनता से जानकारी की। इसके बाद टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
मंगलवार की रात दिल्ली से आई एनआईए और यूपी की एटीएस की टीम ने नगर के मोहल्ला मुल्लाना, इश्लाम नगर, पचदरा और नौगांवा सादात के गांव सैदपुर इम्मा गांव में रेड डाली। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमे दो सगे भाई हैं। टीम ने घरों में करीब दस घंटे सर्च ऑपरेशन चलाया। घरो का कोना अतरा तक खंगाल दिए।
ऑपरेशन के दौरान एनआईए और एटीएस ने चार तमंचे, चार पिस्टल, बारह किलो संदिग्ध आरडीएक्स और रॉकेट लांचर के अलावा दो टाइम बम, टाइमर, भारी मात्रा में आईएसआईएस के बैनर और उसले जुड़ी किताबें बरामद की गई हैं। टीम ने छापा मारते ही संदिग्धों को हिरासत में लेकर नेशनल हाईवे स्थिति वेंक्टेश्वर यूनिवर्सिटी चौकी में नजरबंद किया गया। यहां टीम ने संदिग्धों से करीब पांच घंटे पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक कुछ संदिग्धों ने आईएसआईएस के मॉड्यूल आईएस हरकत उल हर्ब ए इस्लाम से जुड़ा होने की बात स्वीकार की है। इसके बाद टीम करीब चार बजे चौकी से संदिग्धों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो हुई।
एक दिन पहले ही तय हो गया था पूछताछ का स्थान
वैसे तो एनआईए और एटीएस की कार्रवाई पूरी तरह से गोपनीय रखी गई थी। लेकिन संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लेने के बाद पूछताछ के लिए स्थान पहले से तय कर लिया गया था। मंगलवार को ही पूछताछ के लिए वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी चौकी को चुन लिया गया था। वहीं रात में एनआईए और एटीएस के आने की भी सूचना स्थानीय पुलिस को मिल गई थी। लेकिन कार्रवाई कहां होनी है, इसका जानकारी छापे के बाद पता चली।
जमा करा लिए थे स्थानीय पुलिस के मोबाइल
एनआईए और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस साथ में मौजूद रही। लेकिन इन्हें कार्रवाई से दूर रखा गया। टीम ने इनका इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था के लिए किया। वहीं कार्रवाई के दौरान टीम ने स्थानीय पुलिस के मोबाइल जमा करा लिए। यही नहीं इस्लामनगर हबीब के वेल्डिंग के कारखाने पर कार्रवाई के दौरान पड़ोसियों के भी मोबाइल तीन घंटे जमा करा लिए गए थे।
तीस से चालीस गाड़ियों का था का काफिला
एनआईए और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान करीब तीस से चालीस गाड़ियों का काफिला था। इसमें एनएसजी कमांडो सहित अन्य अधिकारी और सिपाही मौजूद रहे। अधिकांश गाड़ियां टैक्सी के रूप में चलने वाली थीं। अलग-अलग टीम बनाकर चार स्थानों पर कार्रवाई चली।