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क्षमा व्यक्ति को अहंकार से दूर कर झुकने की कला सिखाती है : कौशल जैन

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बिलारी। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को पर्यूषण पर्व के समापन के बाद क्षमावाणी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह जैन समाज के लोगों ने वेदी में विराजमान भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक किया। शांतिनाथ भगवान की शांतिधारा के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पार्श्वनाथ भगवान की चौबीसी, भगवान की नित्य नियम पूजा और जिनवाणी का पाठ किया गया।
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क्षमावाणी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कौशल जैन ने कहा कि जैन धर्म हमें क्षमा भाव की सीख देता है। क्षमावाणी मन की कलुषता को दूर करने का पर्व है। क्षमा व्यक्ति को अहंकार से दूर कर झुकने की कला सिखाती है। तीर्थंकरों ने संपूर्ण विश्व में शांति की स्थापना के लिए सभी जीवों से जाने-अनजाने में हुई भूलों और अपराधों के लिए क्षमा मांगने का संदेश दिया है। उन्होंने आगे कहा कि क्षमा करने और क्षमा मांगने के लिए विशाल हृदय की आवश्यकता होती है। इसलिए सभी को एक-दूसरे के प्रति क्षमा भाव रखना चाहिए।
इस अवसर पर पूजा एवं अभिषेक में शामिल महिलाओं को सम्मानित किया गया। वहीं व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जैन, संरक्षक कौशल जैन, राकेश जैन और विनोद जैन ने नेहा जैन, शिल्पी जैन, गरिमा जैन, निधि जैन, पूजा जैन, शगुन जैन, सुरभि जैन, लवी जैन और मानसी जैन को सम्मानित किया।
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