फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: एक सप्ताह में तीसरी बार बड़े अपराध में सामने आया टांडा का नाम

Sun, 25 May 2025 01:16 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
टांडा (रामपुर)। कभी चावल नगरी के नाम से पहचाना जाने वाला टांडा अब अपराध का गढ़ बन चुका है। एक सप्ताह में तीसरी बार बड़े अपराध में टांडा के लोगों का नाम सामने आया है। पुराने नोटों के तस्करों, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने वाले आरोपी के बाद सोना तस्कर पकड़े गए हैं। टांडा के लोगों का नाम इससे पहले भी कई बार सोना तस्करी, हवाला कारोबार, पुराने नोटों की तस्करी, देशविरोधी गतिविधियां में सामने आता रहा है।
विज्ञापन

सोना तस्करी के मामलों में टांडा के कई लोग विदेश की जेलों में बंद हैं। खाड़ी देशों से सोना तस्करी कर भारत लाने के लिए गिरोहों ने पेट में सोने के कैप्सूल छुपाने जैसी खतरनाक तरकीबें इजाद कर ली हैं, जिसमें कई बार तस्करों की जान भी जा चुकी है। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी टांडा के तस्करों की सक्रियता लगातार सामने आती रही है।

इसी कड़ी में पुराने नोटों की तस्करी ने भी टांडा को विवादों में डाल दिया है। एक सप्ताह पहले ही मुरादाबाद के डिलारी थाने की पुलिस ने 1.5 करोड़ रुपये के बंद हो चुके नोटों के साथ टांडा के दो युवकों को गिरफ्तार किया। हवाला कारोबार और अवैध लेन-देन के मामलों में भी टांडा का नाम लगातार उजागर होता रहा है।
विज्ञापन

इतना ही नहीं देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप भी टांडा के लोगों पर लगे हैं। यूपी एटीएस द्वारा पकड़ा गया शहजाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
लूट की घटनाओं ने भी टांडा को अपराध के नक्शे पर ला खड़ा किया है। गिरोहबंदी, अवैध कारोबार और पुलिस-प्रशासन की चुनौतियां अब आम चर्चा का विषय बन चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन अपराधियों के हाैसले बुलंद हैं। अब टांडा का नाम चावल नगरी से ज्यादा तस्करी, हवाला, लूट और देशविरोधी गतिविधियों के लिए लिया जाने लगा है।
-

अपराधियों के निशाने पर आए सोना तस्करसोना तस्करी गिरोह ही अब अपराधियों के निशाने पर आ चुका है। मुरादाबाद में सऊदी अरब से लौट रहे छह लोगों को अपहरण इस बात का सुबूत है। बदमाशों को पुख्ता जानकारी थी कि सऊदी से लाैट रहे लोगों के पेट में साेना है। इसी के बाद बदमाशों ने उनका अपहरण किया था। बदमाश सभी का पीटे चीरने की तैयारी कर रहे थे। गनीमत रही पुलिस माैके पर पहुंच गई और मुठभेड़ में दो बदमाशों को गिरफ्तार कर सभी को सकुशल बचा लिया। अगर पुलिस के पहुंचने में देर होती तो सोना तस्करी गिरोह बदमाशों के हाथों जान गंवा सकता था।
******************

टांडा में सोना तस्करी गिरोह से जुड़ीं प्रमुख घटनाएं और उनसे जुड़ी विभिन्न घटनाएं

पेट में सोना, ऑपरेशन के दौरान मौत
फरवरी 2025 में टांडोला मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद आलम को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। परिजन उसे टांडा में एक निजी क्लिनिक पर लेकर पहुंचे। जांच में डॉक्टर को पेट में कुछ संदिग्ध दिखा, तो ऑपरेशन की सलाह दी गई। ऑपरेशन के दौरान आलम की मौत हो गई। उसके पेट में सोना होने की पुष्टि हुई थी।
-



पेट में सोना छिपाकर लाए 29 युवक लखनऊ एयरपोर्ट से हुए थे फरार

एक अप्रैल 2024 की सुबह शारजाह से लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे रामपुर के टांडा क्षेत्र के 36 तस्करों को कस्टम विभाग ने पकड़ कर उनके कब्जे से करीब 3.2 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी सिगरेट बरामद की थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इनमें से 30 आरोपी पेट में सोना छिपाकर भी लाए हैं। सभी को पकड़ा गया, लेकिन अगले दिन 29 आरोपी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर कस्टम की गिरफ्त से भाग निकले थे। इस सनसनीखेज फरारी के बाद पूरे कस्टम विभाग में हड़कंप मच गया। कस्टम विभाग के सहायक आयुक्त एके सिंह ने सरोजनी नगर थाने में काशिफ समेत 36 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में सोना व सिगरेट तस्करी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। तस्करों की फरारी की घटना के बाद कस्टम विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। मामले की आंतरिक जांच चल रही है।



-



मिलक तहसील में हुई थी सोना तस्करों से लूट

2024 में टांडा निवासी तारिक ने पुलिस को बताया कि वह और उसके साथी अजहर, मुकीम, फरहान चारों लोग सोना लेकर टांडा आ रहे थे। इसी दौरान जब यह लोग रामपुर के मिलक क्षेत्र के मीरगंज पहुंचे, तब उनके वाहन को निशाना बनाकर लुटेरों ने हमला कर दिया और उनके पास से पूरा सोना लूट लिया था। तारिक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और मुठभेड़ के बाद पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पूरी तस्करी और लूट की योजना का खुलासा हुआ था।





**************



सोना तस्करी में छह युवक विदेश की जेलों में बंद

टांडा के छह युवक सऊदी अरब सहित अन्य खाड़ी देशों की जेलों में सोना तस्करी और अन्य मादक पदार्थों की जेलों में बंद हैं। यह लोग सोना भारत में बेचते हैं और गुटखा-सिगरेट खाड़ी देशों में भेजकर कई गुना मुनाफा कमाते हैं। तस्करी के लिए गिरोह लगातार नई तरकीबें अपना रहे हैं। अब यह सोने को छोटे-छोटे कैप्सूल में भरकर निगल लेते हैं। भारत पहुंचकर मल के रास्ते सोना बाहर निकाला जाता है। कई बार पेट में कैप्सूल फंसने पर ऑपरेशन तक कराना पड़ता है। पूर्व में गाजियाबाद में भी पुलिस टीम ने ऐसे तस्करों को पीछा कर पकड़ा था।



-

खुफिया एजेंसियों के रडार पर रहते हैं कई मोहल्ले
टांडा नगर क्षेत्र के कई मोहल्ले खुफिया एजेंसियों के रडार पर रहते हैं। खाड़ी देशों से सोना लाकर तस्करी का धंधा संचालित करने वाले गिरोहों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। नगर के आधा दर्जन मोहल्लों हाजीपुरा, भब्बलपुरी, पुराना बाजार, यूसुफ (चौक) आदि के लोग इस धंधे में लिप्त हैं। पुलिस और कस्टम विभाग की सक्रियता के बावजूद तस्करी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर के सैकड़ों युवक तस्करी के धंधे में लिप्त हैं। सरगना युवाओं को फ्री उमराह यात्रा और मोटी कमाई का झांसा देकर खाड़ी देशों में भेजते हैं। वहां से लौटते समय सोना उनके पेट में छिपाकर भेजा जाता है।




पेट में गोलियां, घर में खास टॉयलेट
तस्करी का तरीका जोखिम भरा है। सोने की छोटी गोलियों को निगलकर लाया जाता है, जिन्हें घर पहुंचने के बाद शौच के जरिये निकाला जाता है। इसके लिए कुछ घरों में विशेष जाली लगी टॉयलेट सीट बनवाई गई हैं, ताकि मल के साथ जाने वाली गोलियां आसानी से अलग हो सकें। सोने की गोलियां खाने से कई तस्करों की तबीयत भी बिगड़ चुकी है। हाजीपुरा मोहल्ला तस्करी के सरगनाओं का गढ़ बन गया है। बताया जा रहा है कि इसी मोहल्ले के दो तस्कर दुबई की जेल में बंद हैं।
-




एयरपोर्ट पर भी रहती है सेटिंग

तस्कर यह भी जानकारी रखते हैं कि कब किस एयरपोर्ट पर कौन अधिकारी ड्यूटी पर है, जिससे उन्हें पकड़ने से बचने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हर बार नए चेहरे पकड़े जाते हैं, जबकि सरगना बच निकलते हैं। वह दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ जैसे एयरपोर्ट पर उतरकर सोना सौंप देते हैं और फिर वापस खाड़ी देशों की उड़ान पकड़ लेते हैं।
00
000

30-40 हजार के लालच में फंस रहे युवा
इस नेटवर्क में जुड़े युवाओं को हर बार की तस्करी के एवज में 30 से 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा फ्री उमराह यात्रा का प्रलोभन भी दिया जाता है। आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण युवा इस जाल में आसानी से फंस रहे हैं। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन तस्करों की बदलती रणनीति उन्हें पकड़ने में बड़ी चुनौती बन रही है।
00
परिजन बोले, उन्हें नहीं है कोई जानकारी
बदमाशों के चंगुल से छुड़ाकर पुलिस की हिरासत में लिए गए लोगों के परिजन बेचैन हैं। परिजन शनिवार को मिलने मुरादाबाद पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मिलने नहीं दिया। जावेद मियां के परिवार वालों ने बताया कि वह चार वर्षों से सऊदी अरब में काम कर रहे थे। वहीं नासिर डेढ़ साल से वहां मजदूरी कर रहे थे। शुक्रवार को वह लौटे ही थे कि यह वारदात हो गई। परिजनों का कहना है कि उन्हें तो यही नहीं पता कि यह सब हुआ कैसे। पुलिस और मीडिया से ही जानकारी मिल रही है। कुछ परिजन मीडिया से बात करने से बचते दिखे। एक महिला परिजन ने कहा कि जब तक वह खुद नहीं बताते, हम क्या बोलें? कोई घर नहीं लौटा है, हम खुद भी परेशान हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें