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Moradabad News: पहले बनाया सहायक अध्यापक...अब फिर प्रधानाध्यापक

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मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में 51 स्कूलों को एकल और शिक्षक विहीन चिह्नित किया है। इसमें शिक्षकों की तैनाती के लिए समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि पहले प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों को जूनियर में सहायक अध्यापक कर दिया था। अब समायोजन के समय फिर प्रधानाध्यापक दिखाया है। साथ ही बिना किसी पॉलिसी के समायोजन किया जा रहा है।
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जिले के 51 परिषदीय स्कूलों में से 42 शिक्षकों में एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि नौ ऐसे विद्यालय हैं जहां पर एक भी शिक्षक नहीं हैं। बीएसए को ज्ञापन देते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा ने कहा कि इसी वर्ष यह तीसरी बार समायोजन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पहले दो बार समायोजन प्रक्रिया हो चुकी है। इसके बावजूद अब लगभग 550 शिक्षकों को सरप्लस बताया गया है।
बड़ी संख्या में प्राइमरी के प्रधानाध्यापक भी शामिल हैं। जबकि समायोजन-2 में प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों को सरप्लस नहीं दिखाया गया था। अब भी प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों को सरप्लस किए जाने के लिए कोई विभागीय आदेश जारी नहीं हुए हैं। जिला मंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा जारी सूची में 150 से कम छात्रसंख्या वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सरप्लस दिखाया गया है। जबकि प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक आवश्यक हैं।
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उन्होंने कहा कि कंपोजिट विद्यालयों में प्राइमरी के प्रधानाध्यापकों को मानव संपदा पोर्टल पर जूनियर सहायक दर्ज किया गया था। लेकिन अब जारी सूची में उन्हें प्राइमरी प्रधानाध्यापक दर्शाकर सरप्लस किया गया है, जो नियमानुसार गलत है। ज्ञापन देने वालों में प्रदीप शर्मा, उपेंद्र, प्रदीप यादव, हिमांशु वशिष्ठ, सुख स्वरूप गुप्ता, राजीव, शिवचरन सैनी आदि मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने बताया कि समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। यह नियमानुसार ही की जाएगी। यदि शिक्षकों ने कुछ आपत्ति व्यक्त की है तो उसका भी संज्ञान लिया जाएगा।

कौन होंगे समायोजित, जानकारी नहीं
कोषाध्यक्ष कुमार सिंह ने बताया कि जब समायोजन किया जा रहा है तो इसकी पूरी पॉलिसी होनी चाहिए। जबकि विभाग द्वारा जारी इस समायोजन की सूची में सिर्फ स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों की संख्या बताई है, उनके नाम की जानकारी नहीं दी है। समायोजन वरिष्ठ शिक्षक का होगा या कनिष्ठ का, इसके बारे में भी कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। न ही विकल्प के संबंध में कोई निर्देश हैं। 31 दिसंबर तक यह समायोजन प्रक्रिया पूरी होनी है, लेकिन पॉलिसी जारी नहीं की है।

पहले रिलीव किए, अब करा रहे ज्वाइन
डॉ. नीरज शर्मा ने कहा कि जिन विद्यालयों में पिछली बार समायोजित करके शिक्षक भेजे गए, वहां अब उनको अतिरिक्त दिखाया जा रहा है। यह गलत है। पहले संबंधित विद्यालय में शिक्षकों की कमी थी और उसी आधार पर शिक्षकों को नियुक्त किया था तो अब ज्यादा कैसे हो गए। इसके अलावा पहले वह शिक्षक जिस विद्यालय में तैनात थे, उनके जाने से वह एकल हो रहा था। इसके बावजूद वह रिलीव कर दिए थे। जब अधिकारियों को इस गलती का आभास हुआ तो संबंधित शिक्षकों को वापस ज्वाइन करवाने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
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