मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी का सिर कलम करने वाले के लिए 11 लाख रुपये इनाम की घोषणा करने वाले दि बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अमीरुल हसन जाफरी के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस पर जाफरी का कहना है कि वह अपने बयान पर अडिग हैं। दर्ज मुकदमे के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे।
शनिवार को आईएमए हाल में पूर्व विधायक राहत मौलाई की स्मृति में आयोजित कौमी एकता प्रोग्राम के दौरान अमीरुल हसन जाफरी ने वसीम रिजवी द्वारा कुरान की 26 आयतों के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में दायर याचिका की न सिर्फ निंदा की थी, बल्कि वसीम रिजवी का सिर कलम करने वाले को 11 लाख रुपये इनाम की घोषणा भी की थी। जाफरी ने कहा था कि अपने स्तर से यह रकम जुटाने के लिए जरूरत पड़ी तो खुद की औलाद भी बेच देंगे। उन्होंने बार एसोसिएशन के सदस्यों से चंदा करके रकम जुटाने की बात भी कही थी। हालांकि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसे जाफरी की निजी राय बताते हुए इसमें किसी तरह के सहयोग से इनकार कर दिया था।
अमीरुल हसन जाफरी का यह बयान हर जगह चर्चा का विषय बना रहा। इस बीच रविवार को सिविल लाइंस थाने में उपनिरीक्षक कपिल कुमार की ओर से अमीरुल हसन जाफरी के खिलाफ धारा 505 (2) (ऐसी बात कहना, जिससे विभिन्न वर्गों में वैमनस्य पैदा हो), 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके बयान से तथा बयान के सोशल मीडिया पर वायरल होने से लोक शांति के भंग होने की प्रबल आशंका बन गई है।
पूर्व बार अध्यक्ष के बयान के संबंध में उप निरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूरे मामले की जांच सिविल लाइंस थाने के अपराध निरीक्षक गजेंद्र त्यागी को सौंपी गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
- अमित कुमार आनंद, एसपी सिटी, मुरादाबाद
अदालत में देंगे दर्ज मुकदमे को चुनौती
मैंने जो कहा वह सही कहा। कुरान की आयतों में कोई भी रद्दोबदल नहीं किया जा सकता। वसीम रिजवी का सिर कलम कर लाने वाले को 11 लाख रुपये इनाम देने के अपने बयान को गलत नहीं मानता। हिंदुस्तान के कानून पर हमे पूरा भरोसा है। इस मामले में प्रशासन ने मेरे खिलाफ जो मुकदमा दर्ज किया है, मैं उसके खिलाफ हाईकोर्ट जाऊंगा जरूरत पड़ी तो सुप्रीमकोर्ट तक लड़ूंगा।
अमीरुल हसन जाफरी, पूर्व अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन, मुरादाबाद
आईपीसी की धारा 505 (2) का तात्पर्य किसी ऐसी बात के कहने से है जिससे विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य पैदा हो। इसमें तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है। गैर जमानती अपराध है। धारा 506 का तात्पर्य धमकी, मृत्यु या घोर चोट पहुंचाने के लिए है। इसमें सात साल का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। यह भी गैर जमानती अपराध है।
- नितिन गुप्ता, डीजीसी (क्रिमिनल)