वर्ष 2008 में प्रथमा बैंक में हुए 20 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफी घोटाले में हाईकोर्ट ने जांच बैठा दी है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नवार्ड चेयरमैन को आदेश दिए हैं कि शक के दायरे में आई प्रथमा बैंक की दस ब्रांचों के ऋण माफी वाले सभी खातों की जांच की जाए। हाईकोर्ट ने नवार्ड चेयरमैन से एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट के आदेश से बैैंक अफसरों में खलबली मची है।
वर्ष 2014 में चंद्रकांत शर्मा की ओर से दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण टंडन एवं न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किए हैं। जनहित याचिका में कहा में कहा गया था कि वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने किसानों का कृषि ऋण माफ किया था। लेकिन प्रथमा बैंक के 168 बांचों में ऋण माफी स्कीम मेें मानकों के अनुसार ऋण माफ न कर उन किसानों के ऋण भी माफ कर दिए गए जो मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
याचिका में आरोप था कि बैंक ने किसानों से रिश्वत लेकर उनके ऋण माफ किए। बैंक की 168 ब्रांचों में दस हजार से अधिक खातों में यह घपलेबाजी की गई। याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने नाबार्ड चेयरमैन को आदेश दिए कि वह योग्य अधिकारियों को टीम बनाकर नमूने के तौर पर प्रथमा बैंक की दस शाखाओं में ऋण माफी के खातों की जांच करें।
इससे पहले वर्ष 2008 में यह घोटाला उजागर होने के बाद प्रथमा बैंक की शाखाओं पर किसानों ने धरना प्रदर्शन किए थे। लेकिन उस वक्त बैंक ने जांच के बाद दावा किया था कि ऋण माफी योजना में किसी तरह की कोई घपलेबाजी नहीं हुई है।
बर्खास्त क्लर्क का दावा, मैंने किया था खुलासा
मुरादाबाद। प्रथमा बैंक के पीपली दौड ब्रांच में तत्कालीन क्लर्क व अकाउंटेंट एस के गोयल का दावा है कि घपलेबाजी को सबसे पहले उन्होंने पकड़ा था। क्लर्क का दावा है कि उसने 23 अगस्त 2008 में अपने एरिया मैनेजर एस के सिंह को पत्र लिखकर घोटाले की जानकारी दी थी। लेकिन एरिया मैनेजर ने इस मामले पर कोई कार्रवाई न कर 2009 में उनका ट्रांसफर करवा दिया था। उल्लेखनीय है कि क्लर्क एसके गोयल को ऋण माफी मामले में पात्र किसानों से घुस लेने के आरोप में 2011 में बर्खास्त किया जा चुका है।
प्रथमा बैंक के इन ब्रांचों के खातों की होगी जांच
धावरसी, चुचेला कलां, जैतोली, सक्तू नगला, ननहेरा, मनौता, रेहरा, अलीपुर चोपला, गजरौला और चकनवाला
कैग ने भी उठाया था सवाल
इस स्कीम के तहत देश भर में घोटालों की आंच उठने पर भारत सरकार ने कैग से इस मामले की जांच कराई थी। इसमें मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर और संभल मेें प्रथमा बैंक में घोटालों की बात भी सामने आई थी। लेकिन इस मामले की पूरी जांच नहीं कराई गई और करोड़ों का घोटाला दबा रह गया।
इन मानकों का हुआ उल्लंघन
स्कीम के तहत उन किसानों के ऋण माफ होने थे जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। जिन किसानों ने 31 मार्च 1997 से 31 मार्च 2007 तक कृषि लोन लिया हो। जिन कृषि लोनों का 2008 तक भुगतान न हुआ हो। समेत इस स्कीम में कई मानक थे
पीपली दौड में ओवर ड्यू करा कर किया घोटाला
प्रथमा बैंक के पीपली दौड में जिन ऋणों में ओवर ड्यू नहीं हो रहे थे, बैंक अधिकारियों ने मानकों से परे जाकर उनके ऋण भी माफ कर दिये । इसके साथ ही उन लोगों के ऋण भी माफ किये गये जिन्होंने 31 मार्च 2007 के बाद ऋण लिये थे।