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अपनों का हाल जानने के लिए छह घंटे भटकते रहे परिजन

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मुरादाबाद। ब्राइट स्टार हास्पिटल में कोरोना संक्रमित छह मरीजों की मौत की खबर जैसे-जैसे फैली, वैसे वहां भर्ती मरीजों के तीमारदारों तथा अन्य तमाम लोगों का रुख होता चला गया। कुछ देर में ही अस्पताल के बाहर भीड़ लग गई। लोगों का आरोप है कि भीड़ के साथ पुलिस और अफसरों की टीमें बढ़ती गईं, लेकिन उन्हें सही जानकारी देने वाला कोई नहीं था। अपनों का हाल जानने के लिए घंटों भटकना पड़ा।
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लोगों का कहना है कि सुबह लगभग आठ बजे के वक्त अस्पताल में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को भी अंदर जाने नहीं दिया जा रहा था। अस्पताल के पिछले गेट से शवों को बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया गया। जिला संभल के कोर्ट पूर्वी निवासी केपी सिंह का आरोप है कि वह अपने 39 वर्षीय बेटे जॉन ई पाल को देखना चाहता थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सभी को बाहर रोक रखा था। दहाड़ें मारकर रो रहीं पीतलनगरी निवासी राकेश कुमार की पत्नी रूबी का आरोप था कि उन्हें कोई बताने वाला नहीं था कि उनके पति किस हाल में हैं। करीब पांच घंटे बाद राकेश कुमार की सलामती की खबर मिली तो जान में जान आई। लाजपतनगर निवासी 35 वर्षीय ओमपाल की पत्नी और भाई ने सवाल उठाया कि जब उनकी तबीयत ठीक होने की जानकारी बराबर दी जा रही थी तो अचानक मरने की खबर क्यों मिली। वहीं पाकबड़ा निवासी सुरेश सैनी ने अपने भाई, बुद्धि विहार निवासी अशोक सिंह ने अपने बेटे और कांशीराम कॉलोनी के दीपक ने अपने पिता का हाल जानने के लिए भटकते रहे।
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