प्रधानमंत्री से मांगेंगे फोकस की पुरानी दरें
फोकस की दरें घटाए जाने से निर्यातकों में हड़कंप मचा हुआ है। नई दरें घोषित होने के बाद उसे फिर से वापस पुरानी रेट लाने के लिए कोशिश शुरू हो गई हैं। इस बार निर्यातक अपनी बात सीधे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए किसी सांसदों से मिलकर समय दिलाने की मांग की जाएगी। निर्यातकों को विदेश में भेजेे जाने वाले प्रोडक्ट निर्माण के लिए आयात की जाने वाली धातु पर सरकार की ओर से रियायत मिलती है। इस छूट के लिए निर्यातकों फोकस लाइसेंस मिलता है।
इसके आधार पर धातु की मात्र निर्धारित होती है। इस धातु से बनाए गए प्रोडक्ट को विदेशों में एक्सपोर्ट करने पर निर्यातक को छूट मिलती है। पहले सात प्रतिशत तक छूट मिलती थी। इस नीति में बदलाव करते हुए सरकार ने शहरों का क्लासिफिकेशन कर दिया। जिन्हें ए, बी और सी श्रेणी में रखा गया। जिनमें निर्यात पर फोकस की दर अलग अलग तय की गईं। इस साल एक मई से नई दर घोषित कर दी गई हैं। जिसमें अलग अलग धातु पर दर अलग अलग हैं।
खास बात ये कि देशों का क्लासिफिकेशन खत्म कर दिया गया है। इसे पांच प्रतिशत से घटाकर दो और तीन प्रतिशत पर का लाभ दिया जाएगा। निर्यातकों का कहना है कि नई दरें निर्यात इंडस्ट्रीज के लिए अच्छी नहीं हैं। आने वाले दिनों में इससे कारोबार गिरेगा। वे इसे कम से कम फीसदी होना चाहिए। इसे पुरानी दरों पर वापस कराने के लिए कोशिशें तेज कर दी गई हैं। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्टस एक्सपोर्टर्स ऐसोसिएशन के पूर्व सचिव सतपाल ने बताया कि इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सांसदों से भी मुलाकात की जाएगी। जिससे वे सरकार में उनकी बात रख सकें। सबसे बड़ी बात कि प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया के असली संचालक हम हैं। ऐसे में हमारी मांग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। तभी योजना सफल होगी।