हिस्ट्रीशीटर मौअज्जम की हत्या में जिला जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सपा विधायक उस्मान उल हक बुधवार को पैरोल पर जेल से बाहर आ गए। 14 मई 2009 को जेल जाने के बाद से उस्मान ने पहली बार खुली हवा में सांस ली है। शासन ने उन्हें एक माह की पैरोल पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया था।
बुधवार सुबह करीब नौ बजे उस्मान जेल से बाहर आए तो उनके समर्थकों की भीड़ जेल गेट पर मौजूद थी। उस्मान के मुखालिफ पक्ष की ओर से भी हाजी जहांगीर को अभी पंद्रह दिन पहले ही पैरोल पर जेल से रिहा किया गया है।
देहात विधायक शमीमुल हक के भतीजे उस्मान उल हक को अदालत ने 14 मई 2009 को वर्ष 2001 में हुई हिस्ट्रीशीटर मौअज्जम की हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
भोजपुर थाना क्षेत्र के गांव पीपलसाना निवासी उस्मान उल हक और उनके चार अन्य साथी तभी से जेल में बंद हैं। मौअज्जम ने अपने साथियों के साथ मिलकर वर्ष 1995 में उस्मान उल हक के चाचा अजीमुल हक की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उस्मान उल हक के पिता और पूर्व विधायक रिजवान उल हक की मौत एक हादसे में हुई थी।
लेकिन रिजवान उल हक की सड़क दुर्घटना को भी मौअज्जम पक्ष से चल रही रंजिश से ही जोड़कर देखा जाता रहा था। मौअज्जम की हत्या अजीमुल हक की हत्या की प्रतिक्रिया में हुई थी। अजीमुल हक की हत्या में मौअज्जम को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी और हत्या के वक्त वह हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहा था।
मौअज्जम पक्ष से हाजी जहांगीर की पैरोल मंजूर होने के बाद ही तय हो गया था कि उस्मान भी जल्द जेल से बाहर आएंगे। एक जनवरी को शासन ने उनकी पैरोल मंजूर कर ली थी। डीएम का आदेश मिलने के बाद बुधवार सुबह करीब सवा नौ बजे उन्हें जेल से छोड़ दिया गया।
चार माह तक बढ़ सकती है पैरोल
फिलहाल उस्मान उल हक को एक माह की पैरोल पर जेल से छोड़ा गया है। लेकिन यदि इस अवधि में उनका आचरण ठीक रहा तो पैरोल अवधि बढ़ भी सकती है। नियमों पर गौर करें तो एक - एक माह करके पैरोल को अधिकतम चार माह तक बढ़ाया जा सकता है। दो माह तक की पैरोल सामान्य बंदियों को भी मिल जाती है। लेकिन उस्मान और जहांगीर का मामला अलग है। इसलिए इनकी पैरोल अवधि चार माह तक भी बढ़ाई जा सकती है।
मां की बीमारी को बताया पैरोल की वजह
उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक उस्मान उल हक ने अपनी बीमार मां का इलाज कराने के नाम पर पैरोल मांगी है। पैरोल की अर्जी में पूर्व विधायक ने कहा था कि उनकी मां बीमार हैं और उनकी देखभाल व इलाज कराने वाला बाहर कोई नहीं है। ऐसे में उन्हें मां का इलाज कराने के लिए पैरोल पर छोड़ा जाए। उनकी दलील को शासन ने जायज मानते हुए उन्हें जेल से पैरोल पर छोड़ने का आदेश दिया है।