मुरादाबाद। जिले के करीब 12 ग्रामीण रूटों पर दो साल बाद भी परिवहन निगम की ओर बसों का संचालन नहीं किया जा सका। इसके कारण सरकार की ओर से गांव-गांव तक बस सेवा शुरू करने की योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
जिले के विभिन्न ग्रामीण रूटों पर बस चलाने के लिए परिवहन निगम की ओर से चार से पांच बार टेंडर निकाला चुका है। लेकिन इन रूटों पर आपरेटराें ने बस संचालन में दिलचस्पी नहीं दिखाई। कोई आपरेटर बस चलाने के लिए तैयार नहीं है। बस मालिकों का कहना कि ग्रामीण रूटों पर बस चलाने से कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए ग्रामीण रूटों पर अनुबंध लेने के लिए वह तैयार नहीं हैं। अगर निगम की ओर से परिचालक दिए जाएं तो वह ग्रामीण रूटों पर बस चलाने के लिए टेंडर डालने के लिए तैयार हैं। वहीं, निगम के पास भी पर्याप्त संख्या में बसें है। इसके बावजूद निगम की ओर से बार-बार टेंडर निकालकर खानापूर्ति की जा रही है।
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शहर से गांव को जोड़ने वाली योजना के तहत रूट
-मुरादाबाद-बबराला
-मुरादाबाद-कूड़ामाफी
-मुरादाबाद-टांडा
-मुरादाबाद-उमरी
-मुरादाबाद-कांठ
-मुरादाबाद-बुजपुर मान
-मुरादाबाद- चकफेरी -मुरादाबाद-धारकनगला
-मुरादाबाद-शरीफनगर
-मुरादाबाद-अलीगंज
-मुरादाबाद-आदमपुर
-मुरादाबाद-रफीपुर
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- ग्रामीण रूटों पर बस चलाने के लिए कुछ शर्तें ऐसी हैं, जिनकी वजह से बस मालिक अनुबंध लेने के लिए तैयार नहीं हैं। जैसे कि बिना टिकट के यात्री पकड़े जाने पर परिचालक पर कड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान, सुबह आठ बजे गांव से बस का निकलना समेत अन्य शर्तें शामिल हैं। - महेंद्र सिंह बग्गा, संरक्षक, अनुबंधित बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन
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- एक रूट पर एक चक्कर चलाकर बस का पैसा नहीं निकाला जा सकता है। ग्रामीण रूट पर बस अनुबंध करने के बाद बस मालिकों को काफी परेशानी होगी। शाम को बस लेकर गांव में पहुंचना और वहां पर रुककर सुबह आठ बजे शहर में आना भी चालकों व परिचालकों को लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा। - अमित गुप्ता, अध्यक्ष, अनुबंधित बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन
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- कुछ ग्रामीण रूटों पर बसें चल रही हैं। ग्रामीण रूटों पर बसों को चलाने के लिए लगातार टेंडर निकाला जा रहा है। अनुबंध होते ही बसें चला दी जाएंगी। - बीएल मिश्रा, एआरएम वित्त