मुरादाबाद। बुद्धि विहार आवास विकास परिषद में स्थित पांच वर्षीय सेमल के पेड़ की कटाई ने शहर के पर्यावरण प्रेमियों को गहरी पीड़ा दी है। 2020 में पौधे के रूप में रोपे गए इस पौधे ने धीरे-धीरे विकास की राह पकड़ ली थी। यह पेड़ मौजूदा समय में न केवल छाया और शुद्ध वायु का स्रोत था, बल्कि राहगीरों, जानवरों और चिड़ियों का भी आश्रयस्थल बन चुका था। बीते मंगलवार को सौंदर्यीकरण और मूर्ति स्थापना के नाम पर कार्यदायी संस्था ने इस पेड़ को काटकर नष्ट कर दिया है। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमियों में गहरी नाराजगी है। हरे पेड़ की कटाई को लेकर इन पर्यावरण प्रेमियों ने शुक्रवार को उसी स्थल पर शोकसभा आयोजित की। इस दौरान लोगों ने मौन रखकर उस पेड़ को श्रद्धांजलि अर्पित की। विरोध जताया। कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत की शीर्ष अदालत ने कहा है कि पेड़ों को काटना इंसान की हत्या के समान है। अगर किसी सड़क या योजना में पेड़ बाधक हों तो सड़क को घुमावदार बनाना या पेड़ को दूसरी जगह स्थानांतरित करना बेहतर विकल्प है।
शोकसभा में पर्यावरणविद् राम सिंह बिष्ट ने कहा कि पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं बल्कि एक जीवित इकाई है। ऑक्सीजन, फल, छाया देता है। सभा में वक्ताओं ने कहा कि अगर कार्यदायी संस्था के पास पेड़ को शिफ्ट करने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं थे तो उन्हें स्थानीय संगठन से सहयोग लेना चाहिए थे लेकिन जल्दबाजी में किए गए सौंदर्यीकरण कार्य ने उसकी जिंदगी छीन ली।
शोकसभा में मौजूद नागरिकों ने संकल्प लिया कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य के लिए एक भी पेड़ की बलि नहीं चढ़ने दी जाएगी। श्रद्धांजलि देने वालों में सीके गोयल, पूरन आर्या, हरि बल्लभ देवरानी, पियूष, शिखर सुमन, आरके शर्मा, राजेंद्र शर्मा, राकेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह यादव, घनश्याम सिंह, विशंभर सिंह, जगतपाल, जयपाल समेत कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। सभा के अंत में उसी स्थान पर एक पौधा भी रोपा गया।
पर्यावरण गंगा समिति के सदस्य ने भी जताई नाराजगी
प्रदेश सरकार की जिला पर्यावरण गंगा समिति के नामित सदस्य प्रदीप सक्सेना ने भी इस घटना पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस संबंध में वन अधिकारी से मिलकर अपना पक्ष रखा। कहा कि सौंदर्यीकरण के कार्य के लिए पेड़ को हस्तांतरित करना चाहिए था लेकिन इसे काट दिया गया है। जिला वन अधिकारी की ओर से जवाब दिया गया कि सेमल का पेड़ संरक्षित की श्रेणी में नहीं आता है।