मुरादाबाद। परिवहन विभाग के लिए बेहद शर्मनाक बात है कि पीतलनगरी डिपो की बसें दिल्ली में प्रवेश के योग्य नहीं हैं। ये बसें अपनी तय किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं इसलिए इन्हें संभल, चंदौसी, रामपुर, अमरोह जैसे छोटे रूट पर चलाया जाता है। दिल्ली जाने के लिए 30 बसें मुरादाबाद डिपो से चलती हैं। इनमें भी 10 बसें जनरथ हैं। खटारा बसों को या तो पीतलनगरी डिपो शिफ्ट कर दिया जाता है या फिर छोटे रूटों पर चलाया जा रहा है।
किराये की दर तो साल दर साल बढ़ रही है, लेकिन सफर खटारा बसों में ही करना पड़ रहा है। मुरादाबाद परिक्षेत्र की 200 से अधिक बसें दस वर्ष की अवधि या अपनी तय किलोमीटर की सीमा पूरी कर चुकी हैं। नियमानुसार इन बसों को कंडम घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन परिवहन निगम लगातार इनका परिचालन कर रहा है। आरटीओ कार्यालय से खटारा बसों की परमिट का नवीनीकरण और फिटनेस भी हो जाती है। इसके बाद बसें रूट पर दौड़ती नजर आती हैं। पिछले चार वर्षों से मुरादाबाद में नई बसों की डिमांड है लेकिन बसें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। पीतलनगरी डिपो की बात करें तो यहां कुल 170 बसें हैं, जिनमें से सिर्फ चार ही दिल्ली के लिए चलती हैं। जबकि मुरादाबाद डिपो में कुल 130 बसें हैं। इनमें 30 दिल्ली या उत्तर प्रदेश के बार्डर तक चलती हैं। इनमें 10 जनरथ (एसी बसें) भी शामिल हैं।
दिल्ली में प्रवेश पर कट चुका है एक लाख रुपये का चालान
दिल्ली में प्रवेश करने पर मुरादाबाद और पीतल नगरी डिपो की अनफिट बसों का कई बार चालान भी कट चुका है। इसमें एक लाख रुपये और इससे अधिक रुपये के चालान भी शामिल हैं। परिवहन निगम मुख्यालय से जब गाज गिरी तो अधिकारियों ने इन बसों को दिल्ली भेजना बंद किया। यदि ज्यादा ट्रैफिक लोड के कारण बसें चलाना भी पड़ती हैं तो सिर्फ कौशांबी तक ही जाती हैं।
अब सामान की किल्लत
रोडवेज की कार्यशाला में बसों की मरम्मत के लिए सामान की कमी है। दिल्ली तो छोड़िए छोटे रूटों पर चलने वाली बसों की भी मरम्मत नहीं हो पा रही है। परिचालकों का कहना है कि बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं तो फिर चालू नहीं होती। बसों में टायर से लेकर, एफआई पंप, गियर बॉक्स, ब्रेक आदि तमाम कमियां हैं। कोरोना के कारण पिछला वर्ष सामान की किल्लत में ही गुजरा है। अब एक बार फिर कम बजट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पिछले दस सालों में इतना बढ़ा किराया
शहर 2011 में किराया 2021 में किराया
मुरादाबाद से अमरोहा 26 रुपये 52 रुपये
मुरादाबाद से रामपुर 26 रुपये 41 रुपये
मुरादाबाद से मेरठ 100 रुपये 146 रुपये
मुरादाबाद से दिल्ली 148 रुपये 207 रुपये
मुरादाबाद से हरिद्वार 150 रुपये 210 रुपये
बजट की कमी के कारण बसों की स्थिति खराब है। जो बसें पुरानी हो चुकी हैं उन्हें छोटे रूटों पर चलाया जा रहा है। पिछला पूरा साल बजट की कमी में गुजर गया। फरवरी में स्थिति कुछ बदली थी, लेकिन अब एक बार फिर यात्रियों की संख्या बहुत कम हो गई है। मेंटेनेंस के सामान की कमी से मुख्यालय को अवगत कराया गया है।
- अतुल जैन, आरएम मुरादाबाद परिक्षेत्रशर्मनाक : दिल्ली में प्रवेश के लायक नहीं पीतलनगरी की बसें
- यात्री कर रहे खटारा बसों में सफर फिर भी हर साल बढ़ रही किराये की दर
- खटारा बसों को पीतलनगरी डिपो कर दिया जाता है शिफ्ट, मुरादाबाद डिपो से दिल्ली के लिए चलती हैं 30 बसें
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुरादाबाद। परिवहन विभाग के लिए बेहद शर्मनाक बात है कि पीतल नगरी डिपो की बसें दिल्ली में प्रवेश के लायक नहीं हैं। ये बसें अपनी तय किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं इसलिए इन्हें संभल, चंदौसी, रामपुर, अमरोह जैसे छोटे रूट पर चलाया जाता है। दिल्ली जाने के लिए 30 बसें मुरादाबाद डिपो से चलती हैं। इनमें भी 10 बसें जनरथ हैं। खटारा बसों को या तो पीतल नगरी डिपो शिफ्ट कर दिया जाता है या फिर छोटे रूटों पर चलाया जा रहा है।
किराये की दर तो साल दर साल बढ़ रही है, लेकिन सफर खटारा बसों में ही करना पड़ रहा है। मुरादाबाद परिक्षेत्र की 200 से अधिक बसें दस वर्ष की अवधि या अपनी तय किलोमीटर की सीमा पूरी कर चुकी हैं। नियमानुसार इन बसों को कंडम घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन परिवहन निगम लगातार इनका परिचालन कर रहा है। आरटीओ कार्यालय से खटारा बसों की परमिट का नवीनीकरण और फिटनेस भी हो जाती है। इसके बाद बसें रूट पर दौड़ती नजर आती हैं। पिछले चार वर्षों से मुरादाबाद में नई बसों की डिमांड है लेकिन बसें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। पीतल नगरी डिपो की बात करें तो यहां कुल 170 बसें हैं, जिनमें से सिर्फ चार ही दिल्ली के लिए चलती हैं। जबकि मुरादाबाद डिपो में कुल 130 बसें हैं। इनमें 30 दिल्ली या उत्तर प्रदेश के बार्डर तक चलती हैं। इनमें 10 जनरथ (एसी बसें) भी शामिल हैं।
दिल्ली में प्रवेश पर कट चुका है एक लाख रुपये का चालान
दिल्ली में प्रवेश करने पर मुरादाबाद और पीतल नगरी डिपो की अनफिट बसों का कई बार चालान भी कट चुका है। इसमें एक लाख रुपये और इससे अधिक रुपये के चालान भी शामिल हैं। परिवहन निगम मुख्यालय से जब गाज गिरी तो अधिकारियों ने इन बसों को दिल्ली भेजना बंद किया। यदि ज्यादा ट्रैफिक लोड के कारण बसें चलाना भी पड़ती हैं तो सिर्फ कौशांबी तक ही जाती हैं।
अब सामान की किल्लत
रोडवेज की कार्यशाला में बसों की मरम्मत के लिए सामान की कमी है। दिल्ली तो छोड़िए छोटे रूटों पर चलने वाली बसों की भी मरम्मत नहीं हो पा रही है। परिचालकों का कहना है कि बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं तो फिर चालू नहीं होती। बसों में टायर से लेकर, एफआई पंप, गियर बॉक्स, ब्रेक आदि तमाम कमियां हैं। कोरोना के कारण पिछला वर्ष सामान की किल्लत में ही गुजरा है। अब एक बार फिर कम बजट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पिछले दस सालों में इतना बढ़ा किराया
शहर 2011 में किराया 2021 में किराया
मुरादाबाद से अमरोहा 26 रुपये 52 रुपये
मुरादाबाद से रामपुर 26 रुपये 41 रुपये
मुरादाबाद से मेरठ 100 रुपये 146 रुपये
मुरादाबाद से दिल्ली 148 रुपये 207 रुपये
मुरादाबाद से हरिद्वार 150 रुपये 210 रुपये
बजट की कमी के कारण बसों की स्थिति खराब है। जो बसें पुरानी हो चुकी हैं उन्हें छोटे रूटों पर चलाया जा रहा है। पिछला पूरा साल बजट की कमी में गुजर गया। फरवरी में स्थिति कुछ बदली थी, लेकिन अब एक बार फिर यात्रियों की संख्या बहुत कम हो गई है। मेंटेनेंस के सामान की कमी से मुख्यालय को अवगत कराया गया है।
- अतुल जैन, आरएम मुरादाबाद परिक्षेत्र