स्कूलों में भी इन दिनों जवान रुके हैं।
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इन दिनों अपने शहर का रंग रूप थोड़ा बदला - बदला सा है। मानो राताेंरात एक नया शहर बस गया हो। पीतल नगरी के लोग हर रोज जिस शहर को देखते हैं, उसकी तस्वीर इन दिनों उससे काफी कुछ इतर है। आप भी चुनावी रंग में रंगे इस शहर को करीब से देखेंगे तो चौंक जाएंगे।
स्कूलों में जिन कक्षाओं में टीचर्स बच्चों को पाठ पढ़ाते हैं वहां इलेक्शन स्टाफ वोटिंग कराने का ककहरा सीख रहा है। बच्चों के प्ले ग्राउंड में ओपन किचन बने हैं। कहीं खुले आसमान के नीचे सैकड़ों इलेक्शन कर्मियों का खाना बन रहा है तो कहीं स्कूलों के ग्राउंड में अर्द्धसैनिक बलों का डेरा है।
सर्किट हाउस के पीछे खुले मैदान में जैसे गाड़ियों का मेला लगा है। तो पुलिस लाइन और आवास विकास के खाली पड़े मैदानों में तंबुओं का नया शहर बन चुका है। पोलिंग पार्टियों के लिए कहीं शामियाने तने हैं तो कहीं लोग अलाव जलाए बैठे हैं।
कुछ स्कूलों का नजारा ब्याह - शादी जैसे माहौल का अहसास दिल रहा है तो कुछ स्कूलों को देखकर लगता है, जैसे स्कूल नहीं पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, पुलिस की छावनी हो। यकीन मानिए इस हालत में यदि टीचर और स्टूडेंट्स अपने स्कूल पहुंच जाएं तो पहली नजर में पहचानना मुश्किल होगा।
तमाम स्कूल जो मतदान केंद्र बनाए गए हैं, उनमें बूथ बनकर तैयार हो चुके हैं। सर्किट हाउस के पीछे आवास विकास के खाली पड़े मैदान से ही पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी। लिहाजा यहां रातभर मेले जैसा माहौल था।