मुरादाबाद मंडल में लोकसभा सीटों पर अब तक हुए चुनावों में चार मौके ऐसे आए जब मंडल की सभी सीटों पर एक ही दल ने कब्जा जमा लिया। इस उपलब्धि को कांग्रेस ने तीन बार 1952, 1957 और 1984 में हासिल किया था। वहीं 2014 में भाजपा ने मंडल की सभी सीटों पर कमल खिलाया था।
1952 और 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने मंडल की सभी सीटें जीती थीं। लेकिन उस समय मंडल की संभल और नगीना लोकसभा सीट अस्तित्व में नहीं आई थी। संभल लोकसभा सीट वर्ष 1977 तो नगीना सीट 2009 में अस्तित्व में आईं। 1952 के चुनाव में मुरादाबाद से कांग्रेस के उम्मीदवार रामसरन, रामपुर से मौलाना अबुल कलाम आजाद, अमरोहा से हिफजुर्रहमान, बिजनौर से स्वामी रामानंद शास्त्री ने जीत दर्ज की थी।
मौलाना अबुल कलाम आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने थे। 1957 के चुनाव में भी कांग्रेस ने मंडल की सभी सीटें जीतीं थीं। इस चुनाव में मुरादाबाद से रामसरन और अमरोहा से हिफजुर्रहमान दूसरी बार सांसद बने। जबकि रामपुर से एस अहमद मेहंदी, बिजनौर से अब्दुल लतीफ गांधी विजयी हुए थे।
वर्ष 1984 में कांग्रेस ने इतिहास को तीसरी बार दोहराया। इस बार मुरादाबाद से कांग्रेस के हाफिज मोहम्मद सिद्दीक, रामपुर से जुल्फिकार अली खान, अमरोहा से रामपाल सिंह, संभल से शांति देवी और बिजनौर से चौधरी गिरधारी लाल ने जीत हासिल की।
1984 के बाद 30 साल बाद यह इतिहास 2014 में दोहराया गया। 2014 में हुए चुनाव में भाजपा ने मंडल की सभी सीटों पर कब्जा किया था। इस लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद से सर्वेश सिंह, रामपुर से डॉ. नैपाल सिंह, अमरोहा से कंवर सिंह तंवर, संभल से सत्यपाल सैनी, बिजनौर से भारतेंद्र सिंह और नगीना से यशवंत सिंह ने भाजपा का परचम लहराया।