महानगर में शासन के 22 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेशों की धज्जियां उड़ गई हैं। 22 घंटे तो दूर 12 घंटे भी बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। यही हाल रहा तो बिजली शहर में कहीं बवाल नहीं करा दे। रमजान का महीना शुरू होने वाला है, यदि आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो लोगों का आक्रोश सड़कों पर आंदोलन का रूप ले सकता है। इन दिनों में सात से आठ घंटे तक तो इमरजेंसी कटौती के नाम पर बिजली काटी जा रही है।
बाकी लोकल फाल्ट पी रहे हैं, इससे भी बची बिजली को शहर में चल रहे सुधार कार्य के कारण ब्रेकडाउन लेकर बंद किया जा रहा है। महानगर में शुक्रवार को भीषण गरमी में लोग पसीना-पसीना थे, ऊपर से बिजली कटौती ने उन्हें परेशान कर दिया। लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, लेकिन इसके बाद भी बिजली अफसर आपूर्ति में सुधार नहीं करा रहे हैं। प्रशासनिक अफसर भी बिजली कटौती से कानून व्यवस्था बिगड़ने के खतरे पर विचार नहीं कर रहे हैं।
रमजान का महीना भी आने वाला है, यदि बिजली कटौती इसी प्रकार होती रही तो लोगों का गुस्सा सड़कों पर आंदोलन बनकर उतर सकता है। शुक्रवार को तो बिजली की कटौती ने पिछले रिकार्ड भी तोड़ दिए कुल मिलाकर आठ घंटे तक इमरजेंसी कटौती हुई। इसके अलावा कई इलाकों में लोकल फाल्ट से पूरे दिन बिजली नहीं आई। सबसे ज्यादा लाइनपार इलाके में बिजली सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक गायब रही।
दिल्ली रोड पर बुद्धि विहार, मिलन विहार, काशीराम कालोनी, प्रेमनगर, प्रकाशनगर और मानसरोवर कालोनी, एकतानगर में भी बिजली नहीं आने से लोगों में आक्रोश था। वहीं कुछ इलाकों में बिजली सुधार के कार्य चलने के कारण ब्रेकडाउन के कारण बिजली आपूर्ति ठप रही। मुगलपुरा, गलशहीद, दौलत बाग, गुलाबबाड़ी, ट्रांसपोर्टनगर इलाके और कांठ रोड पर रामगंगा विहार, आशियाना, हरथला क्षेत्र में भी लोग बिजली आपूर्ति नहीं मिलने से परेशान रहे।
कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी ठप
बिजली नहीं आने के कारण कई इलाकों में नगर निगम की पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई। मुगलपुरा, गलशहीद, करुला, लाइनपार इलाके में ओवरहेड टैंक नहीं भरे जाने के कारण इनसे जुड़े इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी नहीं हो सकी। कुछ इलाकों में जहां जेनरेटर लगे हैं वहां तो नगर निगम को जेनरेटर से ओवरहेड टैंक भरवाने पड़े। जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मई माह में कई बार ऐसा हो चुका है कि बिजली कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति में दिक्कत आई है।