मुरादाबाद। पाकिस्तान बार्डर से आयात बंद होने के कारण कई वस्तुओं के दामों में उछाल आया है। जन्माष्टमी के त्योहार को हर्षोल्लास से मनाने की धूम मची हुई है, लेकिन सूखे मेवाओं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी परेशान किए है। महिलाओं का कहना है कि पकवान बनाने में कुछ तो कंजूसी करनी होगी। वहीं, दुकानदारों का कहना है कि मेवा की मांग में गिरावट दर्ज की गई है।
किराना व्यापारी अजय रस्तोगी का कहना है कि ज्यादातर सूखे मेवे पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आते हैं। पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने पर भारत द्वारा फरवरी में आयात शुल्क बढ़ोतरी के बाद व्यापारिक गतिविधियों पर इतना फर्क नहीं पड़ा था, जितना अब बाघा-अटारी बार्डर पर आयात बंद होने के बाद पड़ रहा है। अखरोट और छुहारा की कीमतों में इजाफा हो रहा है। इसके अलावा लाहौरी नमक की कीमतों में भी प्रति किलो ग्राम 25 से 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। दुकानदार ईशान रस्तोगी का कहना है कि जन्माष्टमी के त्योहार पर सबसे ज्यादा मांग खसखस की रहती है। कीमतों में बढ़ोतरी भी सबसे ज्यादा इसकी ही हुई है। इसकी वजह से बिक्री में गिरावट हुई है। छुहारा आना बाजार में बहुत कम हो गया है। महंगे की वजह से बिक्री पर असर पड़ रहा है। जब मांग ही नहीं आ रही है तो फिर सूखे मेवे मंगवाकर क्या करेंगे।
मेवा पहले कीमत अब कीमत
खसखस 750 1100
अखरोट 400 600
छुहारा 120 250
अंजीर 700 1000
बादाम गिरी 680 720
मुनक्का 400 470
जन्माष्टमी पंजीरी में मेवा पड़ती है। इस बार सभी चीजें महंगी हो गई हैं। प्रसाद की चीज है तो बनानी पड़ेगी, लेकिन अब वह पहले कम हो गया है। खर्चा बजट के हिसाब से ही कर सकते हैं।
अपर्णा, सिविल लाइंस।
जन्माष्टमी के त्योहार पर पाग खासतौर से बनाया जाता है। इसमें सूखे मेवे ही पड़ते हैं। बादाम और खसखस की कीमत बढ़ने की वजह से इस बार कम बनाऊंगी।
जयश्री सिंह, रामगंगा विहार।