प्रचार प्रसार के अभाव में बहुत कम लोगों को जानकारी है कि इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में भी इलाज होता है। परिजन महंगे इलाज के के कारण ड्रग्स के आदी हो चुके लोगों को इलाज नहीं कराते। लेकिन जिला अस्पताल में इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वालों का मुफ्त में इलाज होता है।
अस्पताल में ओपियोड सब्सट्यून थेरेपी प्रोग्राम (ओएसटी) वार्ड में इंजेक्टिवल ड्रग्स यूजर (आईडीयू) का इलाज होता है। वर्तमान में रोजाना करीब एक सौ यूजर दवा खाने अस्पताल पहुंचते हैं। अभी प्रचार प्रसार के अभाव में अधिक यूजर यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। हर महीने औसतन चार से पांच नए मरीज ही यहां अपना पंजीकरण कराते हैं।
वर्तमान में यहां 120 यूजर पंजीकृत हैं। इन ड्रग्स यूजरों का एक साल से तीन साल तक इलाज चलता है। इलाज में इन यूजरों को बूप्रिनॉरफिन की गोली पीसकर उनके जीभ के नीचे डाली जाती है। इससे धीरे-धीरे यूजर ड्रग्स लेना छोड़ देता है। नियमित रूप से अस्पताल में दवा खाने वाले मरीजों में सुधार देखा गया है।
यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर का पंजीकरण होता है। मेडिकल ऑफिसर स्वालेहा खान ने बताया कि ओएसटी का उद्देश्य ड्रग्स के साथ-साथ यूजर को एड्स जैसी बीमारियों से बचाना भी है। क्योंकि यूजर ड्रग्स लेने के लिए किसी तरह के पुराने इंजेक्शन का उपयोेग भी कर लेते हैं। इस साल करीब 12 यूजर में एचआईवी पॉजेटिव पाया गया है।