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नाकारापन लील गया अंग्रेजों का बनाया ड्रेनेज सिस्टम

Thu, 19 May 2016 12:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
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नाला
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कहते हैं तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। हम भी आपके सामने कुछ तस्वीरें रख रहे हैं। जिन्हें देखकर आप खुद फैसला करिए कि हमें बरसात में जलभराव से बचाने के लिए हमारा नगर निगम कितना संजीदा है। कहने को कुछ बाकी नहीं है...सीतापुरी और नेता कालोनी में बीच नालों में साइकिल चलाते और चहलकदमी करते बच्चों की तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि नालों को साफ हुए सालभर से ज्यादा वक्त बीत चुका है।
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जयंतीपुर नाले में उगी बड़ी - बड़ी झाड़ियां भी इस बात का सुबूत हैं कि ये नाले पिछले कई साल से साफ नहीं हुआ। दरअसल ये हर साल की समस्या है। हर बार निगम नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा करता है.. और हर साल शहर के लो लाइन एरिया से लेकर महानगर के पॉश इलाके तक ‘तालाब’ बन जाते हैं। ‘अमर उजाला’ निगम के दावों की ऑन स्पॉट पड़ताल करके हकीकत आपके सामने रखेगा। पहले दिन हमने शहर के उन 14  अंडरग्राउंड नालों को खोजा जिनकी सफाई के नाम पर हर साल करीब दो करोड़ रुपये उड़ा दिए जाते हैं।

जबकि हकीकत ये है कि ये नाले सिस्टम की मेहरबानी से सड़कों, मोहल्लों और बाजारों में दफन हो चुके हैं, ऐसे में इनकी सफाई महज कागजों में ही मुमकिन है। एक - एक करके हम सभी मुख्य नालों की तस्वीर आपके समाने रखेंगे। ताकि मानसून से पहले अफसरशाही को जिम्मेदार का एहसास हो सके।
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 अंग्रेजों के बनाए 14 अंडरग्राउंड नाले शहर में सड़कों और मोहल्लों के नीचे दफन हो गए हैं। अंग्रेजों ने करीब तीस फुट गहरा ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया था। जो पूरे शहर की नालियों के रूटीन पानी और बरसाती पानी को रामगंगा तक पहुंचाता था। नालों की ठीक से सफाई हो सके इसलिए बाकायदा नाले के भीतर सीढ़ियां बनाई गई थीं। लेकिन वक्त के साथ इन नालों के ऊपर दुकान और मकान बनते गए। अब स्थिति ये है कि इन नालों को ढूंढ पाना मुश्किल काम है।

पब्लिक ने तो कब्जा करके घर और दुकान बनाए ही, सिस्टम ने इन नालों के ऊपर सड़कें तक बना डालीं। हालात ये हैं कि इन नालों की सफाई के लिए मेन हॉल तक नहीं बचे हैं। इन्हें कवर करके दुकान बना ली गई हैैं। अंडरग्राउंड नालों के ऊपर बीस से अधिक मोहल्ले बस चुके हैं।
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