मुरादाबाद। जिले में कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन महीने में औसतन हर महीने करीब 1200 लोग कुत्तों के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुंचे। हर तीसरा मरीज बच्चा है। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले एक वर्ष में 14251 लोगों ने कुत्तों के काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाए। इनमें चार हजार से अधिक बच्चे शामिल रहे।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 लोग एआरवी लगवाने पहुंचते हैं। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि गांवों में कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की कार्रवाई नहीं हो रही है। बच्चों और राहगीरों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। जिले की प्रत्येक सीएचसी पर भी हर दिन औसतन 15 से 20 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है। गंभीर मामलों में कई डोज दी जाती हैं। निजी अस्पतालों में इसकी एक डोज पर करीब 300 रुपये तक खर्च आता है। कुत्तों के काटने के जिले में पहले भी कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं।ठाकुरद्वारा में इससे पहले भी छह सितंबर 2024 को रतूपुरा गांव में कुत्ते के हमले में घायल शान (3) की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
वहीं 22 अगस्त 2025 को एक कुत्ते ने काटा था। मोहल्ला नई बस्ती निवासी शमीम अहमद के पुत्र साद पर घर के सामने ही कुत्ते ने हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया था। उसके शरीर पर जख्मों के आठ निशान मिले थे। परिजन उसे लेकर सरकारी अस्पताल में पहुंचे, जहां पर उसको 22, 23, 26 और 30 अगस्त को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए गए थे। एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि अस्पताल में एआरवी और एंटी रैबीज सीरम दोनों उपलब्ध हैं। हर दिन करीब 100 लोग इंजेक्शन लगवाने आते हैं।